जनकपुरी इलाके में सड़क पर बने गहरे गड्ढे के कारण हुए हादसे में जान गंवाने वाले उत्तराखंड के युवक कमल ध्यानी के परिवार के लिए राहत की खबर आई है। दिल्ली सरकार ने पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता देने और परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने का भरोसा दिलाया है।मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल निवासी कमल की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था। सरकार की ओर से कहा गया है कि यह सहायता परिवार को आर्थिक संबल देने और कठिन समय में उनके साथ खड़े रहने के उद्देश्य से दी जा रही है।
सांसद अनिल बलूनी की पहल लाई रंग
गढ़वाल लोकसभा सीट से सांसद अनिल बलूनी ने शनिवार को रेखा गुप्ता से मुलाकात कर इस मामले में हस्तक्षेप का अनुरोध किया।सांसद ने मुख्यमंत्री को बताया कि मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल निवासी कमल ध्यानी अपने परिवार का एकमात्र सहारा था और उसकी असामयिक मृत्यु से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मुलाकात के बाद सांसद बलूनी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है। सरकार परिवार के एक सदस्य को रोजगार उपलब्ध कराएगी और नियमानुसार जल्द ही आर्थिक मुआवजा भी दिया जाएगा।
क्या थी पूरी घटना?
मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल (उत्तराखंड) के खंदवाड़ी (ध्यानी) गांव निवासी 25 वर्षीय कमल ध्यानी दिल्ली में एक निजी बैंक में कार्यरत थे। 5 और 6 फरवरी की दरमियानी रात वे जनकपुरी क्षेत्र में दिल्ली जल बोर्ड द्वारा खोदे गए लगभग 15 फुट गहरे गड्ढे में गिर गए, जिससे उनकी मौत हो गई।परिजनों का आरोप है कि जल बोर्ड ने खुदाई के बाद मौके पर न तो चेतावनी संकेत लगाए और न ही पर्याप्त बैरिकेडिंग की व्यवस्था की। उनका कहना है कि इसी प्रशासनिक लापरवाही के कारण एक होनहार युवक की जान चली गई।
सड़कों पर उतरा जनसैलाब
दिल्ली के जनकपुरी इलाके में हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद उत्तराखंडी प्रवासी संगठनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिला। 15 फरवरी को घटनास्थल पर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने ‘हम चुप नहीं रहेंगे’ और ‘पहाड़ के बेटे को न्याय दिलाओ’ जैसे नारों के साथ पोस्टर और बैनर लहराए। लोगों का आरोप था कि संबंधित विभागों की लापरवाही के कारण एक निर्दोष युवक की जान चली गई, इसलिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
सरकार से थी नौकरी और मुआवजे की मांग
मृतक के एक रिश्तेदार ने कहा कि प्रशासन की घोर लापरवाही के कारण एक हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। उनका आरोप था कि यदि समय पर पुलिस और चिकित्सा सहायता मिल जाती, तो शायद कमल की जान बचाई जा सकती थी। वहीं प्रवासी संगठन के प्रतिनिधि गोपाल सिंह ने भी घटना पर गहरा दुख जताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि उन्हें न्याय और सहारा मिल सके।
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