CG News : रोहित कश्यप, मुंगेली. जिले के 41 हाई और हायर सेकेंडरी स्कूलों के विद्यार्थियों को इस सत्र में व्यावसायिक शिक्षा के लिए जिन सुविधाओं का इंतजार था, वह अब तक कागजों में ही अटकी हुई हैं. समग्र शिक्षा के तहत सत्र 2025-26 के लिए प्रति विद्यालय 2-2 लाख रुपये, यानी कुल 82 लाख रुपये की वित्तीय स्वीकृति नवंबर 2025 में जारी कर दी गई थी, लेकिन अब तक यह राशि स्कूलों तक नहीं पहुंच पाई है.


दसवीं और बारहवीं की परीक्षाएं शुरू हो चुकी हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब पूरा शैक्षणिक सत्र समाप्ति की ओर है, तब छात्रों को मिलने वाली शैक्षणिक और प्रयोगात्मक सुविधाओं का औचित्य क्या रह जाएगा. खासकर व्यावसायिक शिक्षा के विद्यार्थियों को पूरे सत्र में इसका लाभ नहीं मिल पाया, जिससे उनके परीक्षा परिणाम को लेकर भी चिंता जताई जा रही है. यह स्थिति तब है, जब व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े विषयों को कक्षा 9वीं से 12वीं तक अनिवार्य बनाया जा चुका है.
नवंबर में स्वीकृति, फरवरी में भी खाली हाथ स्कूल
नई दिल्ली स्थित शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य परियोजना कार्यालय के माध्यम से प्रदेश के जिलों के लिए अलग-अलग राशि स्वीकृत की गई थी. मुंगेली जिले के 41 विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालन के लिए यह बजट जारी होना था. दिशा-निर्देश स्पष्ट थे कि राशि पीएफएमएस प्रणाली के जरिए संबंधित विद्यालयों के प्राचार्यों को वित्तीय लिमिट के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी.
इस राशि का उपयोग ए4 पेपर, लैब मरम्मत, प्रिंटर रिपेयरिंग, इलेक्ट्रिकल सुधार, इंटरनेट बिल, प्रयोगशाला सामग्री, करियर गाइडेंस, काउंसिलिंग, जागरूकता कार्यक्रम, बैनर-प्लेक्स सहित अन्य आकस्मिक व्ययों पर किया जाना था. लेकिन हकीकत यह है कि अब तक किसी भी प्राचार्य को वित्तीय लिमिट जारी नहीं हुई. इसके फलस्वरूप व्यावसायिक शिक्षा से जुड़े छात्र पूरे सत्र में सुविधाओं से वंचित रहे.
खरीदी स्कूल से होनी थी, ठेकेदारों की नजर?
निर्देशों के मुताबिक सामग्री की खरीदी विद्यालय स्तर पर की जानी थी और स्टॉक पंजी में प्रविष्टि अनिवार्य रखी गई थी. साथ ही छत्तीसगढ़ भंडार क्रय नियमों का पालन सुनिश्चित करना भी जरूरी था.
हालांकि, सूत्रों के अनुसार जिला और राज्य स्तर के ठेकेदारों और सप्लायरों की नजर इस राशि पर टिकी हुई थी. चर्चा है कि खरीदी प्रक्रिया को केंद्रीकृत करने की कोशिशें हुईं, जिससे विद्यालय स्तरीय स्वायत्तता पर सवाल खड़े हो गए हैं. यदि परीक्षाएं शुरू होने के बाद आनन-फानन में खरीदी होती है, तो उसकी उपयोगिता और औचित्य पर प्रश्न उठना तय है.
मार्च में खत्म होगा बजट सत्र, राशि के ‘लेप्स’ की आशंका
मार्च में बजट सत्र समाप्त होने वाला है. यदि समय रहते राशि स्कूलों तक नहीं पहुंचती, तो इसके ‘लेप्स’ होने की आशंका जताई जा रही है. वहीं परीक्षा के बाद खर्च किया जाता है, तो यह सवाल उठेगा कि जब विद्यार्थियों को पूरे सत्र में लाभ नहीं मिला, तो खर्च का औचित्य क्या है. शिक्षा विभाग की यह लेटलतीफी सीधे तौर पर विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मामला बन गई है.
पीएमओ और सीएमओ ने लिया संज्ञान!
मामले को लेकर मीडिया में लगातार खुलासे हो रहे हैं. खबर है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने भी प्रकरण का संज्ञान लिया है. सूत्रों के मुताबिक, केंद्र स्तर पर उच्च स्तरीय जांच की तैयारी की जा रही है. यदि व्यावसायिक शिक्षा को निजीकरण या केवल खरीद-फरोख्त तक सीमित करने के संकेत मिले, तो संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों पर कठोर कार्रवाई संभव है.
अब निगाहें मुंगेली प्रशासन और राज्य सरकार पर टिकी हैं. क्या छात्रों को उनका हक समय पर मिलेगा या यह राशि भी कागजों में ही सिमटकर रह जाएगी?
क्या बोले अफसर?
इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) एल पी डाहिरे ने कहा कि प्रक्रिया जारी है और जल्द ही स्कूलों को राशि जारी कर दी जाएगी.
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