अमित पांडेय, खैरागढ़। जिले के ठेलकाडीह थाना क्षेत्र के ग्राम गहिरा-गोपालपुर में हुए बहुचर्चित बुजुर्ग हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा किया है। जिस वारदात ने पहले पूरे गांव को चोरी के बाद की गई हत्या समझने पर मजबूर कर दिया था, वह दरअसल अंदरूनी रंजिश, अपमान और संदेह की पृष्ठभूमि से जुड़ा निकला।
27 फरवरी की सुबह करीब 8:30 बजे पुलिस को सूचना मिली कि गहिरा-गोपालपुर निवासी लेडगूराम वर्मा की उनके घर में हत्या कर दी गई है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। घटना स्थल पर घर की पिछली खिड़की टूटी हुई थी और आलमारी में तोड़फोड़ के निशान थे, जिससे प्रथम दृष्टया मामला चोरी के दौरान हत्या का प्रतीत हो रहा था। मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉग स्क्वॉड और एफएसएल की सीन ऑफ क्राइम टीम को बुलाकर साक्ष्य जुटाए गए।

जांच के दौरान पुलिस ने आसपास के ग्रामीणों, परिजनों और संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की। बयानों और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर गांव के ही युवक बिरेन्द्र कुमार वर्मा पर संदेह गहराया। हिरासत में लेकर की गई सख्त पूछताछ में आरोपी टूट गया और हत्या करना स्वीकार कर लिया।
पुलिस के अनुसार आरोपी ने बताया कि मृतक अक्सर उसके घर आता-जाता था और खेती-किसानी व घरेलू काम को लेकर उसे अपमानित करता था। आरोपी का आरोप है कि मृतक उसके परिवार की एक महिला पर बुरी नजर रखता था और उसके सामने आपत्तिजनक व्यवहार करता था। इन बातों को लेकर उसके मन में गहरा आक्रोश पनप रहा था। आरोप है कि 26 फरवरी की रात करीब 11 बजे, जब मृतक अपने घर में सो रहा था, तब आरोपी कुल्हाड़ी (टंगिया) लेकर पहुंचा और सिर पर तीन वार किए। इसके बाद गला दबाकर उसकी हत्या कर दी। वारदात के बाद पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से घर की खिड़की तोड़ी और आलमारी में तोड़फोड़ कर चोरी का आभास देने की कोशिश की।
आरोपी के मेमोरेंडम के आधार पर हत्या में प्रयुक्त टंगिया, खून से सने कपड़े और अन्य साक्ष्य बरामद कर जब्त कर लिए गए हैं। पुलिस ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद आरोपी को न्यायिक रिमांड पर भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है। घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। यह मामला न केवल एक आपराधिक कृत्य है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि व्यक्तिगत रंजिश, सामाजिक अपमान और संदेह की आग किस तरह हिंसक परिणाम तक पहुंच सकती है। फिलहाल पुलिस आगे की विवेचना में जुटी है।

