प्रदीप मालवीय, उज्जैन। चंद्रग्रहण के सूतक काल खत्म होने के बाद बाबा महाकाल का शुद्धिकरण किया गया। महाकालेश्वर मंदिर की शिखर समेत गर्भगृह, नंदी हॉल और परिसर की जल से सफाई की गई। साथ ही महाकाल भगवान को शुद्ध जल और दूध से स्नान कराया गया।
बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार कर संध्या आरती
दरअसल, चंद्रग्रहण और सूर्यग्रहण के खत्म होने के बाद मंदिर का विधिवत रूप से शुद्धिकरण किया जाता है। इसी कड़ी में महाकालेश्वर मंदिर के शिखर पर शुद्ध पानी से जलवर्षा कर शुद्धिकरण किया गया। इसके बाद बाबा महाकाल का विशेष श्रृंगार कर संध्या आरती की गई।

अनादिकाल से ग्रहण के दौरान नहीं लगता भोग
वेदकाल में अनादिकाल से ग्रहण के दौरान भोग नहीं लगाने की परंपरा है। इसी वजह से संध्या आरती में बाबा महाकाल को महाभोग लगाया गया। बता दें कि धार्मिक नगरी उज्जैन में सूतक काल की शुरुआत सुबह 6:20 से हुई, जिसके बाद शहर के अधिकांश वैष्णव मंदिरों में पट बंद किए गए। कई जगह मंदिर के मेन गेट पर ताले लगाए गए। वहीं मूर्तियों को कपड़े से ढंका गया था। हालांकि दर्शन का सिलसिला लगातार जारी रहा।

3 बजकर 20 मिनट पर लगा साल का पहला चंद्र ग्रहण
साल का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 20 मिनट पर लगा। जिसका सूतक काल सुबह 6.20 से लगा है। सूतक काल में देवी देवताओं के पूजन पर प्रतिबंध लगने के कारण मंदिरों के कपाट को बंद रखा गया। शहर के छोटे बड़े मंदिरों के पट सुबह 6 बजे से ही बंद किए गए है। इस दौरान मंदिरों में सन्नाटा पसरा रहा। उज्जैन के मंगलनाथ मंदिर, सांदीपनि आश्रम, अंगारेश्वर महादेव मंदिर में भी पट बंद किए गए थे।
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