दुर्गेश राजपूत, नर्मदापुरम। सुप्रसिद्ध सेठानी घाट पर होली के पावन पर्व का आगाज भव्य और आध्यात्मिक वातावरण में हुआ। यहां आयोजित पारंपरिक कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक आस्था को प्रदर्शित किया, बल्कि सामाजिक सौहार्द की एक सुंदर तस्वीर भी पेश की। संस्कारधानी के हृदय स्थल सेठानी घाट पर भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक होली पर्व की शुरुआत यहां मां नर्मदा की विशेष महाआरती के साथ हुई। शाम ढलते ही पूरा घाट दीपों की रोशनी और मंत्रोच्चार से गुंजायमान हो उठा।

श्रद्धालुओं की भारी उपस्थिति के बीच पंडितों द्वारा मां नर्मदा का विधि-विधान से पूजन किया गया। महाआरती के बाद परंपरा अनुसार होलिका दहन संपन्न हुआ। जैसे ही होलिका की अग्नि प्रज्वलित हुई, पूरा आकाश ‘हर-हर नर्मदे’ के जयकारों से गूंज उठा। लोगों ने अग्नि की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना की और अपनी बुराइयों को इस पवित्र अग्नि में त्यागने का संकल्प लिया। ​इस साल का मुख्य आकर्षण फूलों की होली रही। 

होलिका दहन के तुरंत बाद, उपस्थित जनसमूह ने एक-दूसरे पर टेसू और गुलाब की पंखुड़ियों की बौछार कर उत्सव मनाया। गुलाल के स्थान पर फूलों के उपयोग ने न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया, बल्कि वातावरण को सुगंधित और दिव्य बना दिया।​आयोजन में शहर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।

सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन और पुलिस बल मुस्तैद रहा। घाट पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष इंतजाम किए गए थे ताकि महाआरती और दर्शन में कोई बाधा न आए।​रात देर तक घाट पर उत्सव का माहौल बना रहा और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश कर गया।

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