कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। नगर निगम इन दिनों कंगाली के दौर से गुजर रहा है, उनसे अपनी आय बढ़ाने के प्रयास भी तेज किये है। इस बीच कांग्रेस से महापौर डॉ शोभा सिकरवार ग्वालियर कलेक्टर के सामने VIP विजिट से निगम के खजाने पर पड़ रहे असर की बात रखने जा रही है। विपक्ष इसे अतिथि सत्कार की परंपरा का अपमान बता रहा है।

बजट में आय बढ़ाने से जुड़े कई मुद्दे शामिल

दरअसल ग्वालियर नगर निगम का हाल ही में बजट पेश हुआ था, बजट में आय बढ़ाने से जुड़े कई मुद्दों शामिल किए गए थे। लेकिन अब महापौर डॉ शोभा सिकरवार खर्चो में कटौती पर भी काम कर रही है, ताकि निगम के खजाने पर पड़ रहे फिजूलखर्ची के बोझ को कम किया जा सके। महापौर का कहना है कि ग्वालियर में केंद्र और प्रदेश सरकार के नेता, मंत्री और VIP विजिट के कारण निगम को अपने खजाने से अतिरिक्त काम करने में खर्चा करना पड़ता है।

जनता का दर्द सभी समझ सके

स्वागत सत्कार से लेकर सड़क, सफाई और अन्य बन्दोबस्त में होने वाले खर्चे को कम कर काफी बचत सालभर में की जा सकती है। जिससे अन्य विकास औऱ जनकार्य से जुड़े काम किये जा सकते है। महापौर का कहना है कि शहर की जनता जिस हालात में जी रही है, उसी तस्वीर को नेता, मंत्री और VIP के सामने भी रखना चाहिए। ताकि जनता का दर्द सभी समझ सके। जल्द ही कलेक्टर से इस विषय में चर्चा करने के बाद परिषद में ठहराव भी लाया जाएगा।

अकेले ग्वालियर निगम का बजट ही क्यों बिगड़ रहा

नेता प्रतिपक्ष हरिपाल का कहना है कि निगम का निर्माण आज नहीं हुआ है, चुनाव सहित अन्य आयोजनों के दौरान नेता मंत्री आते हैं ऐसे में पहली बार ऐसा सुनने मिल रहा है कि उनके आने से निगम पर बोझ पड़ता है। अपनी गलतियों और कमी छुपाने के लिए यह सब किया जा रहा है। भाजपा की वरिष्ठ महिला पार्षद अपर्णा पाटिल का भी कहना है कि आतिथ्य सत्कार करना हमारी पुरानी परंपरा है। अकेले ग्वालियर निगम का बजट ही क्यों बिगड़ रहा है? असली बात यह है कि उनके पास कोई विजन नहीं है, इसलिए हालत यह है कि निगम को कर्ज लेना पड़ रहा है।

कुछ ना कुछ सौगात देने ही आते

निगम सभापति मनोज तोमर का कहना है कि जो भी VIP आते हैं। सरकार चलाने वाले नेता केंद्र या प्रदेश के हो, वरिष्ठ जन और वीआईपी जब भी आते हैं तो शहर को कुछ ना कुछ सौगात देने ही आते हैं। इससे शहर में काम भी होते हैं और कई काम ऐसे भी होते हैं जो सालों से नहीं होते हैं वह भी हो जाते हैं। इसलिए VIP तो शहर के अंदर आते ही रहना चाहिए। अब देखना होगा कि कलेक्टर से चर्चा के बाद यदि VIP विजिट पर होने वाले खर्चे से दूरी बनाने का निगम का यह कदम परिषद में ठहराव के रूप में आता है तो परिषद इस पर क्या निर्णय लेती है।

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