पटना। बिहार की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने की चर्चाओं के बीच एनडीए सरकार का नया खाका तैयार हो गया है। नीतीश कुमार ने जदयू विधायकों को आश्वस्त करते हुए कहा, चिंता मत कीजिए, मैं हूं ना। इस बदलाव की सबसे बड़ी खबर नीतीश के पुत्र निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री है, जो 8 मार्च को जदयू की सदस्यता ग्रहण कर बिहार भ्रमण पर निकलेंगे।

​सरकार का नया गणित और कैबिनेट फॉर्मूला

​नई एनडीए सरकार में मुख्यमंत्री पद भाजपा के पास जाने की संभावना है, जबकि जदयू के दो डिप्टी सीएम बनाए जा सकते हैं। 36 सदस्यीय कैबिनेट के संभावित फॉर्मूले के अनुसार:
​भाजपा: 17 मंत्री (मुख्यमंत्री सहित)
​जदयू: 15 मंत्री
​लोजपा (आर): 2 मंत्री (एक डिप्टी सीएम पद की भी मांग)
​हम (से) और रालोमो: 1-1 मंत्री
​वर्तमान नीतीश कैबिनेट के लगभग 90% चेहरों को दोबारा जगह मिलने की उम्मीद है, हालांकि भाजपा मिथिलांचल से कुछ नए नाम जोड़ सकती है।

​प्रमुख पदों का बंटवारा और जातीय समीकरण

​पदों के बंटवारे में सामाजिक संतुलन का खास ख्याल रखा गया है। विधानसभा अध्यक्ष का पद भाजपा के पास रहेगा, जबकि विधान परिषद का सभापति जदयू से होगा। जदयू इस पद पर किसी EBC (अति पिछड़ा) नेता को बैठाकर अपना कोर वोट बैंक मजबूत करना चाहती है। वहीं, भाजपा नेतृत्व भी भविष्य की राजनीति को देखते हुए EBC कोटे से मुख्यमंत्री बनाने के विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रहा है।

​जदयू में संगठनात्मक बदलाव

​राजनीतिक हलचल के बीच उमेश सिंह कुशवाहा लगातार तीसरी बार निर्विरोध जदयू के प्रदेश अध्यक्ष चुन लिए गए हैं। दूसरी ओर, सहयोगी दल लोजपा (आर) ने राज्यसभा सीट का दावा छोड़कर अब उपमुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी ठोक दी है। ‘हम’ से संतोष सुमन और रालोमो से दीपक प्रकाश का मंत्री बने रहना लगभग तय माना जा रहा है।

​नीतीश का संदेश: मार्गदर्शन करता रहूंगा

​नीतीश कुमार ने स्पष्ट किया कि वे अपनी इच्छा से राज्यसभा जा रहे हैं, लेकिन बिहार एनडीए का मार्गदर्शन करते रहेंगे। उनके हटने के बाद जदयू ‘लव-कुश’ और EBC समीकरणों को ध्यान में रखते हुए अपने मंत्रियों का चयन करेगी। अब सबकी नजरें 8 मार्च पर टिकी हैं, जब निशांत कुमार औपचारिक रूप से पार्टी की कमान संभालने की दिशा में पहला कदम बढ़ाएंगे।