राजनांदगांव। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा आयोजित की जा रही 10वीं तथा 12वीं बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन 16 मार्च से शुरू किया जाएगा, जिसकी तैयारी शुरू कर दी गई है. कॉपियों के मूल्यांकन के लिए राजनांदगांव जिले में एकमात्र स्टेट हायर सेकेंडरी स्कूल को मूल्यांकन केंद्र बनाया गया है. मूल्यांकन के दौरान पुलिस की भी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था रहेगी.

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ज्ञात हो कि राजनांदगांव जिले में 20 और 21 फरवरी से दसवीं तथा बारहवीं बोर्ड की परीक्षा संपन्न कराई जा रही है. जिले के कुल 88 परीक्षा केंद्रों में बोर्ड की परीक्षा संपन्न हो रही है. 10वीं और 12वीं बोर्ड की परीक्षा पर नजर रखने के लिए जिला स्तर पर गठित उड़नदस्ता टीम द्वारा लगातार परीक्षा पर नजर भी रखी जा रही है.

स्टेट हायर सेकेंडरी स्कूल प्रबंधन की माने तो दसवीं तथा 12वीं बोर्ड के कॉपियों के मूल्यांकन में 450 से अधिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाएगी. इसके लिए अनुभवी शिक्षकों की सूची तैयार करके का कार्य भी तेज कर दिया गया है.

स्टेट हायर सेकेंडरी स्कूल के सहायक समन्वयक सुशील तिवारी ने बताया कि संभवतः 12 और 13 मार्च को छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा 10वीं और 12वीं बोर्ड की कॉपियां भेजी जाएगी. पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच बोर्ड की कॉपियों का मूल्यांकन सुनिश्चित कराया जाएगा. इसके लिए कक्ष की तैयारी शुरू कर दी गई है.

मोखली एनीकट से पानी लेने के बाद भी शिवनाथ नदी में पानी कम

राजनांदगांव। जिला मुख्यालय में पानी की सर्वाधिक उपयोग होने के कारण जीवनदायिनी शिवनाथ नदी में पानी की कमी देखने को मिल रही है. मोहारा एनीकट मैं पानी कम हो जाने के बाद अब नगर निगम द्वारा मोखली एनीकट से पानी लिया जा रहा है. उसके बाद भी पानी में कमी देखने को मिल रही है.

नगर निगम के आधिकारिक सूत्रों की माने तो प्रथम चरण में मोगली एनीकट से 50 एमसीएफटी पानी लेकर जलापूर्ति कराई जा रही है. सुबह और शाम के समय नलों से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है. गर्मी के दिनों में मटिया मोती जलाशय और मोगरा बैराज से पानी लेकर जलापूर्ति सुनिश्चित की जाएगी.

ज्ञात हो कि राजनांदगांव जिला मुख्यालय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 51 वार्ड में शहरवासियों को पर्याप्त पानी की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए वितरण पाइपलाइन का अधिक से अधिक विस्तार सुनिश्चित किया गया है. 45000 से अधिक नल कनेक्शन के माध्यम से जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है. 15 से अधिक स्थानों पर बृहद टंकियों का निर्माण सुनिश्चित कराने के साथ-साथ शहर वासियों को प्रतिदिन चार करोड़ लीटर पानी की जलापूर्ति सुनिश्चित कराई जा रही है.

ज्ञात हो कि राजनांदगांव जिला मुख्यालय से महज कुछ दूरी पर स्थित शिवनाथ नदी के तट पर बनाए गए एनीकट मैं पानी की कमी हो जाने के बाद अब नगर निगम द्वारा प्रथम चरण में मोखली एनीकट से 50 एमसीएफटी पानी लेकर शहरवासियों की प्यास बुझाई जा रही है. नगर निगम के आधिकारिक सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वर्तमान में मोखली एनीकट से पानी लिया जा रहा है.

बकाया किराया नहीं चुकाने पर 16 गुमटियां सीलबंद

दुर्ग। निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत मानस भवन के पास लगे अस्थाई गुमटीधारियों पर निगम प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई. गुमटीधारियों द्वारा लंबे समय से बकाया किराया राशि जमा नहीं किए जाने के कारण आयुक्त सुमित अग्रवाल के सख्त निर्देश पर निगम के बाजार विभाग के ईश्वर वर्मा और शशिकांत यादव अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे. निगम अमले ने मानस भवन के पास लगे अस्थाई 16 गुमटियों को सीलबंद करने की कार्रवाई की.

निगम प्रशासन ने बताया कि कई बार नोटिस देने के बाद भी संबंधित मीधारियों द्वारा किराया राशि जमा नहीं की गई, जिसके चलते यह सख्त कदम उठाया गया. निगम प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निगम सीमा क्षेत्र अंतर्गत जिन दुकानदारों द्वारा बकाया किराया राशि जमा नहीं की जाएगी, उन दुकानों पर भी इसी प्रकार सीलबंद की कार्रवाई कर निगम आधिपत्य में लिया जाएगा. आयुक्त सुमित अग्रवाल ने कहा कि निगम की संपत्तियों का किराया समय पर जमा करना आवश्यक है. नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

निगम कोष में राशि जमा नहीं करने पर दो कर्मचारी निलंबित

दुर्ग। निगम आयुक्त सुमित अग्रवाल की सख्ती राजस्व वसूली में अनियमितता एवं निगम कोष में राशि जमा नहीं करने के मामले में सख्त कार्रवाई करते हुए दो कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार सहायक ग्रेड – 03 संकेत धर्मकार द्वारा अपने प्रभार वार्ड से वसूल की गई 32,336 रुपये की राशि निगम कोष में जमा नहीं करने पर 21 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. इसके बाद केशबुक मिलान में कुल 2,53,383 रुपये निगम कोष में जमा नही किया जाना पाया गया, जिसके संबंध में 24 फरवरी को अंतिम चेतावनी पत्र भी जारी किया गया था. निर्धारित समयावधि तक राशि जमा नहीं करने तथा रसीद बुक से वसूली गई राशि समय पर निगम कोष में जमा नहीं किए जाने पर आयुक्त ने संकेत धर्मकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है.

इसी प्रकार सहायक राजस्व निरीक्षक विवेक सालवनकर द्वारा अपने प्रभार वार्ड से वसूल की गई 36,586 रुपये की राशि निगम कोष में जमा नहीं करने के कारण 21 जनवरी 2026 को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था. केशबुक मिलान के बाद 91,383 रुपये निगम कोष में जमा करने हेतु 24 फरवरी 2026 को अंतिम चेतावनी पत्र जारी किया गया, किन्तु निर्धारित समयावधि के बावजूद राशि जमा नहीं की गई. इसे कदाचार मानते हुए छत्तीसगढ़ सिविल (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के नियम 9(1) के तहत आयुक्त द्वारा विवेक सालवनकर को भी तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है.

भिलाई निगम ने टाउनशिप क्षेत्र के लीजधारियों को फिर दी चेतावनी

भिलाईनगर। चेतावनी: प्रबंधन ने कहा, अनाधिकृत निर्माण का नियमितीकरण संभव नहीं निगम ने कहा, टाउनशिपवासियों बीएसपी टाउनशिप क्षेत्र के लीजधारी टाउनशिप में अनाधिकृत निर्माण लेना होगा, वर्ना नियमानुसार कार भिलाई निगम और बीएसपी मैनेजमेंट के बीच बुरी तरह फंस गए हैं.

भिलाई निगम ने पहले अतिरिक्त निर्माण के नियमितीकरण कराने के लिए चेतावनी दी थी और अब उसने भवन निर्माण के लिए अनुमति (अनुज्ञा) नहीं लेने पर चेतावनी जारी कर दिया है. इधर भिलाई निगम उन्हें चेतावनी दे रहा है तो दूसरी ओर बीएसपी मैनेजमेंट . जाहिर है कि भिलाई निगम और बीएसपी मैनेजमेंट के बीच ठन गई है लेकिन लीजधारियों को समझ नहीं आ रहा कि आखिर करें तो करें क्या?

असल में विवाद की शुरुआत हुई. भिलाई निगम की ओर से 25 फरवरी को प्रकाशित आम सूचना से . निगम के भवन अधिकारी की ओर से प्रकाशित आम सूचना में लिखा था- ‘भिलाई इस्पात संयंत्र द्वारा लीज पर प्रदत्त आवासीय / व्यावसायिक/ अन्य भवनों का जिसमें लीजधारी द्वारा अनाधिकृत रूप से विस्तारीकरण करते हुए निर्माण किया है. ऐसे भवनों को नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 के प्रावधानों के अंतर्गत नियमितीकरण करने की कार्यवाही नगर पालिक भिलाई द्वारा की जा रही है.

भिलाई निगम की सूचना प्रकाशन के तीन दिन बाद ही बीएसपी मैनेजमेंट ने भी सूचना प्रकाशित कर एक तरह से भिलाई निगम के साथ साथ बीएसपी के आवंटियों को भी खबरदार कर दिया. मैनेजमेंट ने अपनी सूचना में कहा कि बीएसपी टाउनशिप क्षेत्र एवं उसके अंतर्गत ‘लोक परिसर’ है. आशय है कि लोक परिसर में भिलाई निगम का नियम अधिनियम लागू नहीं होगा.

बीएसपी ने साफ साफ यह भी चेता दिया कि यदि कोई आवंटी नियमितीकरण की कार्यवाही करता है तो वह पूर्णतः उसके स्वयं के जोखिम एवं लागत पर होगी. आवंटियों द्वारा निगम के साथ की गई कोई भी नियमितीकरण कार्यवाही, बीएसपी पर बंधनकारी नहीं होगी. बीएसपी ने परोक्ष रूप से भिलाई निगम को चेता दिया कि वह बीएसपी प्रशासित क्षेत्र में दखल न दे, हस्तक्षेप न करे.

शहर में ‘त्रिनेत्र’ योजना का बंटाधार, 100 से अधिक कैमरे बंद

राजनांदगांव। राजनांदगांव शहर को कैमरे की निगाह में रखने के लिए तकरीबन दो साल पहले शुरू की गई त्रिनेत्र योजना आज पर्यन्त मूर्तरूप नहीं ले पाई है. कथित समाजसेवियों के देख-रेख में इस योजना का हाल इस कदर खराब हुआ है कि शहर में लगाए गए मुश्किल से 150 कैमरों में से 100 से अधिक कैमरे पूरी तरह से बंद पड़े हुए हैं. त्रिनेत्र योजना का बंटाधार हो गया है.

राजनांदगांव शहर में कैमरे लगाने की योजना को लेकर तकरीबन दो साल पहले शहर के कुछ समाजसेवियों को शामिल कर एक कमेटी बनाई गई थी. योजना का नाम त्रिनेत्र दिया गया था. इस कमेटी के नेतृत्व में ही शहर में कैमरे लगाए जाने थे. सबसे बड़ी बात कैमरा लगाए जाने के लिए राजनांदगांव में सामाजिक संस्थाओं व्यापारियों, उद्योगपतियों से करोड़ों रूपए से लेकर निजी अस्पतालों सहित बड़े की वसूली की गई थी. इस योजना को शुरू हुए दो साल से अधिक समय बीत गया है. एक जानकारी के मुताबिक शहर में लगभग 160 कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें 100 से अधिक कैमरे बंद है. कमेटी द्वारा भरपूर राशि वसूलने के बाद भी सस्ती क्वालिटी का पीवीसी बाक्स लगाया गया है.

शहर में जगह-जगह कैमरे के लिए लगाए गए नार्मल पोल उखड़ गए हैं. इन पोलो की हालत खराब है. दुर्घटना को आमंत्रण देते नजर आ रहे हैं. कई जगह पोल लटक गए हैं. शहर में अर्थिंग की भी समस्या बनी हुई है. पुलिस कंट्रोल रूम में जो एक साथ बड़ी टीवी लगना था, नार्मल टीवी लगाकर उसका भी मैनेजमेंट खराब त्रिनेत्र कर दिया गया है. बताया गया है कि योजना के लिए शहर में पुलिस एवं जिला प्रशासन के देख-रेख में एक कमेटी का गठन किया गया था. इस कमेटी को लेकर शुरू दिन से ही इसलिए विवाद सामने आया था. क्योंकि एक संस्था से जुड़े अधिकांश लोग ही कमेटी में सदस्य बनाए गए थे. अब शहर की सबसे बड़ा काम कैमरा लगाने का जब हाशिए पर चला गया था, तब कोई भी जिम्मेदार कुछ भी बोलने के लिए तैयार नहीं है. शहर की जनता द्वारा दी गई राशि का इससे बड़ा दुरूपयोग कहीं नजर नहीं आ रहा है.

खैरागढ़ नगर पालिका को मिला सीएमओ, पुनीत राम वर्मा संभालेंगे

खैरागढ़। लंबे समय से प्रशासनिक अस्थिरता से जूझ रही खैरागढ़ नगर पालिका परिषद को आखिरकार स्थायी मुख्य नगर पालिका अधिकारी मिल गया है. नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने पुनीत राम वर्मा को खैरागढ़ नगर पालिका परिषद का नया मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) नियुक्त किया है. उनकी नियुक्ति से नगर में प्रशासनिक कामकाज को गति मिलने और रुके हुए विकास कार्यों के आगे बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है.

पिछले कई महीनों से नगर पालिका में स्थायी सीएमओ की अनुपस्थिति के कारण प्रशासनिक कार्यों में सुस्ती देखी जा रही थी. कई महत्वपूर्ण फाइलें लंबित रही है. और विभिन्न विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी देरी हो रही थी. ऐसे में शासन द्वारा पूर्णकालिक अधिकारी की नियुक्ति को नगर की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

दुकान नीलामी विवाद के बाद ठप पड़ गया कामकाज

दरअसल, नवंबर 2025 में नगर पालिका उस समय विवादों में आ गई थी जब दुकान नीलामी से जुड़े मामले में तत्कालीन सीएमओ और प्रभारी अधिकारी का नाम सामने आया और मामले की जांच के बाद शासन ने उन्हें निलंबित कर दिया था, जबकि मामले में सीएमओ की गलती नहीं बताई जा रही थी. इसके बाद खैरागढ़ नगर पालिका की जिम्मेदारी गंडई नगर पंचायत के सीएमओ अविनाश देवांगन को अतिरिक्त प्रभार के रूप में दी गई थी.

अतिरिक्त प्रभार से धीमा एक ही अधिकारी के पास दो नगरीय निकायों की जिम्मेदारी होने के कारण खैरागढ़ नगर पालिका के कामकाज की पड़ा कामकाज गति प्रभावित होने लगी थी. फाइलों के लंबित रहने से कई योजनाओं पर निर्णय नहीं हो पा रहे थे, और छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी लोगों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ रहा था. इससे आम नागरिकों में असंतोष भी बढ़ने लगा.

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