ओडिशा में तंबाकू प्रतिबंध को लेकर दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने चबाने वाले तंबाकू से जुड़े नोटिफिकेशन पर फिलहाल रोक लगा दी है। इस मामले की अगली सुनवाई 10 अप्रैल को होगी.
सुनवाई के दौरान सीनियर एडवोकेट सी.एस. वैद्यनाथन और विवेक कोहली के साथ नलिन तलवार, येशी, लोकल एडवोकेट और मनोज गुप्ता अदालत में पेश हुए। वैद्यनाथन ने कोर्ट को बताया कि चबाने वाला तंबाकू COTPA (सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट्स एक्ट) के दायरे में आता है, न कि फूड सेफ्टी एक्ट के तहत।
उन्होंने दलील दी कि राज्य सरकार को चबाने वाले तंबाकू पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है।
इस पर राज्य सरकार के वकील ने आपत्ति जताते हुए कहा कि तंबाकू को फूड कैटेगरी में रखा गया है, इसलिए राज्य सरकार को कार्रवाई करने का अधिकार है।
इसके बाद एडवोकेट विवेक कोहली ने कोर्ट को बताया कि बैन नोटिफिकेशन में जोड़ा गया प्रावधान भ्रामक है, क्योंकि इसे वर्ष 2018 में ही हटा दिया गया था।
दोनों पक्षों की लंबी बहस सुनने के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता की दलीलों से सहमति जताई और चबाने वाले तंबाकू से जुड़े नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगा दी। साथ ही मामले को अंतिम सुनवाई के लिए 10 अप्रैल को सूचीबद्ध किया गया है।
गौरतलब है कि ओडिशा सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने 22 जनवरी को गुटखा, पान मसाला और तंबाकू या निकोटीन वाले सभी उत्पादों के निर्माण, प्रोसेसिंग, पैकेजिंग, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, डिस्ट्रीब्यूशन और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा की थी।
जारी नोटिफिकेशन में गुटखा के साथ-साथ तंबाकू या निकोटीन युक्त सभी उत्पादों पर स्पष्ट रोक लगाई गई थी। हालांकि राज्य में 2013 से ही तंबाकू उत्पादों की बिक्री पर प्रतिबंध लागू है। नया आदेश पहले से मौजूद भ्रम को दूर करने और पूरे राज्य में एक समान नियम लागू करने के उद्देश्य से जारी किया गया था।

वहीं सरकारी जानकारी के मुताबिक, 1 फरवरी से पान मसाला, सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लगाया गया है, जबकि बीड़ी पर 18 प्रतिशत जीएसटी लागू है।
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