गोविंद पटेल, कुशीनगर. अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई के प्रशासनिक दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गए हैं. नेबुआ नौरंगिया थाना क्षेत्र के कोटवा स्थित एक निजी अस्पताल में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया. परिजनों ने अस्पताल संचालक पर लापरवाही और गलत इलाज का आरोप लगाया है. जानकारी के अनुसार मठिया बुजुर्ग निवासी निलेश अपनी पत्नी नितू को प्रसव पीड़ा होने पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खड्डा लेकर पहुंचे थे. वहां चिकित्सकों ने हालत गंभीर बताते हुए उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया. परिजन जिला अस्पताल ले जाने के बजाय कोटवा स्थित एक निजी अस्पताल (खुशी हॉस्पिटल) में पहुंच गए.

आरोप है कि अस्पताल संचालक ने पहले पैसे जमा करवाए और उसके बाद प्रसव कराया. प्रसव के दौरान नवजात बच्ची की मौत हो गई. वहीं प्रसूता की हालत बिगड़ने पर उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया, जहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उसे भी मृत घोषित कर दिया. परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद अस्पताल संचालक ने अमानवीयता दिखाते हुए मृत नवजात को दवा के डिब्बे में रखकर अस्पताल के बाहर जनरेटर के पास छोड़ दिया और मौके से फरार हो गया. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया. पीड़ित पति ने अस्पताल संचालक के खिलाफ थाने में तहरीर देकर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है.

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जिलाधिकारी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और अस्पताल को सील कर दिया. एसडीएम खड्डा ने भी घटनास्थल का निरीक्षण कर मामले की जांच कर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है. इस घटना के बाद एक बार फिर जिले में धड़ल्ले से संचालित हो रहे अवैध अस्पतालों पर सवाल खड़े हो गए हैं. लोगों का कहना है कि प्रशासन की अनदेखी के कारण ऐसे अस्पताल गरीब और भोले-भाले लोगों की जान के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं. मुख्य चिकित्सा अधिकारी चंद्र प्रकाश ने बताया कि मामले की जांच के लिए टीम भेजी गई है. जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित अस्पताल संचालक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.