LPG Supply Shortage : शहरों में होटल, खाने की जगहें, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड बिजनेस इस समय कमर्शियल गैस की बढ़ती कीमतों और सप्लाई में रुकावटों से जूझ रहे हैं. गैस सिलेंडर की ज्यादा कीमत और कई जगहों पर समय पर सप्लाई न होने से बिजनेस की लागत तेजी से बढ़ रही है.

अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर सिर्फ किचन तक ही नहीं रहेगा, बल्कि पूरे फ़ूड और बेवरेज मार्केट और हजारों करोड़ रुपए के बिजनेस पर पड़ सकता है.

पहले कितने हजार करोड़ का टर्नओवर था?

बड़े शहरों में होटल, रेस्टोरेंट, खाने की जगहें, केटरिंग और स्ट्रीट फूड समेत फ़ूड सर्विस सेक्टर एक बहुत बड़ा बिजनेस है. अनुमान है कि मीडियम और बड़े शहरों में फूड सर्विस इंडस्ट्री का सालाना टर्नओवर 3 से 4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा है. एक ही बड़े शहर में, होटल, खाने की जगहें, फूड स्टॉल और केटरिंग का टर्नओवर सालाना लगभग 8 से 10 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है. इसमें सबसे ज्यादा खर्च कमर्शियल गैस और किचन ऑपरेशन पर होता है.

अब बिजनेस पर इसका कितना असर पड़ सकता है?

बिज़नेस करने वालों का कहना है कि अगर कमर्शियल गैस की कीमतें बढ़ती रहीं. सप्लाई की दिक्कतें बनी रहीं, तो खाने-पीने के बिजनेस पर काफी असर पड़ सकता है.

छोटे होटलों और ढाबों का प्रॉफिट 20 से 30 परसेंट तक कम हो सकता है.
कई छोटे स्ट्रीट फूड स्टॉल बंद हो सकते हैं.
शहरों में फूड बिजनेस का टर्नओवर 10 से 15 परसेंट तक कम हो सकता है.

एक्सपर्ट्स का अंदाजा है कि अगर यह हालात लंबे समय तक रहे, तो देश भर में फूड सेक्टर को 20 से 30 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता है.

छोटे बिजनेस पर सबसे ज्यादा संकट

महंगे सिलेंडर का सबसे ज्यादा असर छोटे बिज़नेस पर पड़ रहा है. बड़े होटल और रेस्टोरेंट कुछ हद तक खर्च मैनेज कर सकते हैं, लेकिन छोटे ढाबों और फूड स्टॉल के लिए हर सिलेंडर की कीमत मायने रखती है. कई ढाबा चलाने वालों का कहना है कि वे एक दिन में 2 से 4 कमर्शियल सिलेंडर इस्तेमाल करते हैं. पहले गैस का खर्च मैनेज किया जा सकता था, लेकिन अब वे बिजनेस रेवेन्यू का एक बड़ा हिस्सा खा रहे हैं.

खाने-पीने की चीज़ों की कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद

अगर गैस की कीमतें ज्यादा रहीं, तो होटल और रेस्टोरेंट मालिकों को खाने-पीने की चीजों की कीमतें बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ सकता है. इससे मार्केट में कई चीजों के दाम बढ़ सकते हैं.

होटल और रेस्टोरेंट का खाना और महंगा हो सकता है.
ढाबा थाली और नाश्ते के दाम बढ़ सकते हैं.
मिठाई और बेकरी के आइटम और महंगे हो सकते हैं.
चाय, समोसे और कचौरी जैसे स्ट्रीट फूड के दाम भी बढ़ सकते हैं.

इसका मतलब है कि कमर्शियल गैस की कीमतों का असर धीरे-धीरे आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है.

कमर्शियल गैस संकट से कई दिक्कतें हो सकती हैं ?

  • खाने के बिजनेस में इन्वेस्टमेंट कम हो सकता है.
  • छोटे होटल और रेस्टोरेंट बंद हो सकते हैं.
  • कस्टमर की संख्या कम हो सकती है.
  • खाने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं.

इस दिक्कत को दूर करने के लिए क्या जरूरी है?

  1. रेगुलर गैस सप्लाई – गैस एजेंसियों और एडमिनिस्ट्रेशन को यह पक्का करना चाहिए कि सप्लाई में कोई रुकावट न आए.
  2. छोटे बिजनेस के लिए राहत – सरकार छोटे होटल और रेस्टोरेंट चलाने वालों को कुछ समय के लिए राहत दे सकती है.
  3. अल्टरनेटिव एनर्जी का इस्तेमाल – कुछ बड़े होटल इंडक्शन या दूसरे एनर्जी ऑप्शन अपना सकते हैं.
  4. जमाखोरी रोकना – अगर मार्केट में आर्टिफिशियल गैस की कमी हो रही है, तो सख्त एक्शन लेना जरूरी है.

आगे क्या होगा?

अभी, होटल और फूड बिज़नेस से जुड़े लोग इस बात से परेशान हैं कि अगर कमर्शियल गैस की कीमत और सप्लाई की दिक्कतें जल्द ही हल नहीं हुईं, तो इसका असर पूरे फूड सेक्टर पर पड़ेगा.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर यही हालात लंबे समय तक रहे, तो यह संकट सिर्फ किचन तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि हजारों करोड़ रुपये के फूड बिजनेस और आम लोगों की जेब पर भी पड़ेगा.