Strait of Hormuz: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष (ईरान-अमेरिका-इजरायल युद्ध) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर मचे घमासान के बीच भारत को बड़ी कूटनीति जीत हासिल हुई है। ईरान (Iran) से भारत (India) के लिए गुड न्यूज आई है। अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारतीय जहाज पार हो सकेंगे। भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) के बीच हुई बातचीत के बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज भारत जाने वाले जहाजों को पार होने की इजाजत दे दी है। ये भारत की कूटनीतिक सफलता है, क्योंकि वर्तमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों का ट्रैफिक 90% तक कम हो गया है और कई देशों के टैंकर फंस गए हैं।

ये भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। यहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का 20% हिस्सा गुजरता है।

सूत्रों ने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से हुई टेलीफोनिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी गई है। ये भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा गुजरता है। सूत्रों ने बताया कि दोनों देशों के विदेश मंत्री की बातचीत का उद्देश्य इस अहम समुद्री मार्ग को खुला रखना था, जिससे कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की आपूर्ति प्रभावित न हो।

USA-यूरोप और इजरायल पर जारी रहेगा प्रतिबंध

ईरान ने यह विशेष रियायत भारत को ऐसे वक्त में दी है जब अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों को इस मार्ग पर कड़े प्रतिबंधों का सामना करना पड़ रहा है। भारत को छूट देते हुए ईरान ने ये भी स्पष्ट किया है कि अमेरिका, यूरोप और इजरायल से जुड़े जहाजों पर फिलहाल प्रतिबंध जारी रहेंगे, लेकिन भारतीय टैंकर सुरक्षित रूप से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजर सकेंगे।

रूस और फ्रांस के विदेश मंत्रियों से भी की बात

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने केवल ईरान ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर अन्य प्रमुख शक्तियों के साथ भी तालमेल बिठाया। उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सेर्गेई लावरोव और फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बारो से भी इस गंभीर मुद्दे पर चर्चा की। इन चर्चाओं का उद्देश्य समुद्री व्यापारिक मार्गों को खुला रखना और वैश्विक सप्लाई चेन को टूटने से बचाना था.भारत की इस सक्रिय विदेश नीति ने ये साबित कर दिया है कि तनाव के वक्त में भी वह अपने हितों की रक्षा के लिए सभी पक्षों के साथ संवाद स्थापित करने में सक्षम है।

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