Rajasthan News: राजस्थान के प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों एक नई लिस्ट ने भारी खलबली मचा दी है। दरअसल, केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के आधार पर राजस्थान कैडर के 281 IAS अधिकारियों की अचल संपत्ति का ब्यौरा सार्वजनिक कर दिया है। लिस्ट सामने आते ही ब्यूरोक्रेसी में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।

अंबरीश कुमार सबसे आगे

मिली जानकारी के अनुसार, संपत्ति के मामले में 1990 बैच के अधिकारी काफी आगे नजर आ रहे हैं। इस लिस्ट में अंबरीश कुमार ₹20.62 करोड़ से अधिक की संपत्ति के साथ प्रदेश के सबसे अमीर IAS अधिकारी बनकर उभरे हैं। वहीं, अतिरिक्त मुख्य सचिव शिखर अग्रवाल भी किसी से कम नहीं हैं। उनके पास ₹11.56 करोड़ की संपत्ति है, जिसमें जयपुर, उदयपुर और अलवर जैसे शहरों में शानदार होटल, रिसॉर्ट और फार्महाउस जैसी 14 यूनिट्स शामिल हैं।

प्रमुख अधिकारियों का हाल

वित्त प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालने वाले वैभव गालरिया की जयपुर और भीलवाड़ा में करीब ₹9.68 करोड़ की प्रॉपर्टी है। 1993 बैच के संदीप वर्मा ₹6 करोड़ की संपत्ति के साथ सूची में शामिल हैं। वहीं जोगाराम की संपत्ति का ब्यौरा ₹5.28 करोड़ दर्ज किया गया है।

सादगी की मिसाल बने मुख्य सचिव

गौरतलब है कि इस पूरी सूची में सबसे चौंकाने वाला नाम राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का है। जहां अन्य अधिकारियों की करोड़ों की संपत्ति की चर्चा है, वहीं श्रीनिवास की संपत्ति का ब्यौरा काफी सीमित है। सूत्रों के मुताबिक, उनकी वार्षिक किराया आय मात्र ₹4 लाख है और उन्होंने अपनी कई संपत्तियां अपनी बेटी के नाम ट्रांसफर कर रखी हैं। इसके अलावा विकास सीताराम भाले की संपत्ति भी सिर्फ ₹17.50 लाख बताई गई है।

रियल एस्टेट बना कमाई का बड़ा जरिया

आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि रियल एस्टेट इन अधिकारियों के लिए निवेश का सबसे पसंदीदा जरिया रहा है। प्रवीण गुप्ता जैसे अधिकारियों ने जो फ्लैट्स पहले खरीदे थे, उनकी कीमत आज कई गुना बढ़ चुकी है। वहीं, प्रमुख सचिव गायत्री राठौड़ अपनी कमर्शियल प्रॉपर्टी से ही सालाना ₹38.88 लाख की कमाई कर रही हैं। हालांकि, कई अधिकारियों ने अपनी संपत्तियों का पूर्ण खुलासा नहीं किया है, जिससे यह लिस्ट और भी चर्चा का विषय बन गई है। वहीं जबकि कुछ ने संपत्तियों में पत्नियों को हिस्सेदार बनाया है।

पढ़ें ये खबरें