अनमोल मिश्रा, सतना। शहर में घरेलू और कॉमर्शियल गैस सिलेंडरों की किल्लत का असर अब सरकारी संस्थानों पर भी दिखाई देने लगा है। इसका ताजा उदाहरण सरदार वल्लभभाई पटेल जिला चिकित्सालय में देखने को मिला, जहां गैस सिलेंडर उपलब्ध न होने के कारण मरीजों के लिए बनने वाला भोजन चूल्हे पर लकड़ी जलाकर पकाया जा रहा है। यहां करीब 500 मरीजों का भोजन बनाया जा रहा है। जिला अस्पताल की रसोई का ठेका शिवाय एसोसिएट के पास है।

जानकारी के अनुसार जिला अस्पताल की रसोई में भर्ती मरीजों के लिए रोजाना बड़ी संख्या में भोजन तैयार किया जाता है। सामान्य दिनों में यह भोजन गैस सिलेंडरों की सहायता से बनाया जाता है, लेकिन पिछले कुछ दिनों से घरेलू और कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण अस्पताल प्रबंधन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि रसोई में गैस खत्म होने के बाद नए सिलेंडर समय पर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में कर्मचारियों ने अस्थायी रूप से चूल्हा बनाकर लकड़ी के सहारे भोजन पकाने की व्यवस्था की है। 

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लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने की प्रक्रिया धीमी होने के कारण मरीजों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने में भी दिक्कत आ रही हैं। अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि भोजन मिलने में देरी होने से परेशानी बढ़ रही है। कई बार भोजन तैयार होने में अधिक समय लग जाता है, जिससे मरीजों को इंतजार करना पड़ता है। 

स्वास्थ्य विभाग के जानकारों का कहना है कि जिला अस्पताल जैसे बड़े संस्थान में गैस सिलेंडर की नियमित आपूर्ति बेहद जरूरी है, क्योंकि यहां रोजाना सैकड़ों मरीज भर्ती रहते हैं और उनके लिए भोजन तैयार करना अनिवार्य व्यवस्था का हिस्सा है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि गैस आपूर्ति की समस्या जल्द दूर होने पर अस्पताल की रसोई व्यवस्था फिर से सामान्य हो सकेगी और मरीजों को समय पर भोजन मिल पाएगा।

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