अविनाश श्रीवास्तव/सासाराम। जिला मुख्यालय के कोटा स्थित शहीद चंद्र भूषण एचपी गैस एजेंसी पर गुरुवार को भारी अराजकता की स्थिति देखने को मिली। घंटों इंतजार के बाद भी जब एजेंसी का ताला नहीं खुला, तो सैकड़ों उपभोक्ताओं का सब्र टूट गया और उन्होंने जमकर हंगामा किया। यह घटना न केवल गैस की भारी किल्लत को उजागर करती है, बल्कि जिला प्रशासन द्वारा आपूर्ति दुरुस्त होने के खोखले दावों की भी पोल खोलती है।

खाली हाथ लौट रहे लोग

​आक्रोशित उपभोक्ताओं का कहना है कि सिलेंडर की बुकिंग कई दिन पहले ही की जा चुकी है, लेकिन डिलीवरी का नामोनिशान नहीं है। एजेंसी संचालकों द्वारा बार-बार होम डिलीवरी का आश्वासन देकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा है। हकीकत यह है कि न तो लोगों के घरों तक सिलेंडर पहुंच रहे हैं और न ही काउंटर से वितरण किया जा रहा है। चैत्र नवरात्र और रमजान जैसे पवित्र त्योहारों के बीच रसोई गैस न मिलने से लोगों के सामने भूखे रहने की नौबत आ गई है।

​अब आत्महत्या के अलावा कोई रास्ता नहीं

​हंगामे के दौरान एक महिला उपभोक्ता की व्यथा ने सबका दिल दहला दिया। भावुक होते हुए उन्होंने बताया कि गैस न होने के कारण उनके बच्चे और बुजुर्ग सास-ससुर आधे पेट भोजन करने को मजबूर हैं। महिला ने अत्यंत निराशा में यहां तक कह दिया कि भुखमरी और प्रशासन की अनदेखी से तंग आकर अब उनके पास आत्महत्या करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

​प्रशासन के कागजी दावे

​जिला प्रशासन लगातार प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह दावा कर रहा है कि जिले में गैस का पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। लेकिन कोटा एजेंसी पर लगा ताला और उमड़ी आक्रोशित भीड़ इन दावों को झुठला रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अधिकारी केवल कागजी खानापूर्ति में व्यस्त हैं, जबकि धरातल पर जनता दाने-दाने को मोहताज हो रही है। इस अव्यवस्था ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।