कुंदन कुमार/पटना। बिहार में कृषि और सहकारिता के परिदृश्य को बदलने के लिए राजधानी पटना के होटल पनाश कौटिल्य में एक उच्चस्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। सहकारिता विभाग द्वारा आयोजित इस विशेष सत्र में न केवल राज्य के आला अधिकारी, बल्कि नीति आयोग के वरिष्ठ अधिकारी और सदस्य भी मुख्य रूप से मौजूद रहे। इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए नीतिगत ढांचे पर विचार-विमर्श करना था।

​किसानों की आय दोगुनी करना प्राथमिकता

​कार्यशाला को संबोधित करते हुए बिहार के सहकारिता मंत्री प्रमोद चंद्रवंशी ने सरकार के विजन को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नेतृत्व में हमारा लक्ष्य बिहार के किसानों की आय को दोगुना करना है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए नीति आयोग के विशेषज्ञों के साथ तकनीकी और रणनीतिक चर्चा अनिवार्य है, ताकि जमीनी स्तर पर योजनाओं का लाभ पहुंच सके।

​कृषि विविधीकरण और रोजगार पर जोर

​केवल पारंपरिक खेती ही नहीं, बल्कि कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों में भी संभावनाओं को तलाशने पर चर्चा हुई। मंत्री ने बताया कि कार्यशाला में बकरी पालन, मधुमक्खी पालन और मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को बढ़ावा देने पर विस्तार से रणनीति बनाई जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण युवाओं के लिए ज्यादा से ज्यादा स्वरोजगार के अवसर पैदा करना है, ताकि पलायन को रोका जा सके और गांवों की अर्थव्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाया जा सके।

​पैक्स की भूमिका और भविष्य की योजनाएं

​सहकारिता मंत्री ने पैक्स (PACS) की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विभाग पैक्स के माध्यम से लगातार किसानों तक पहुंच रहा है। आने वाले समय में नई योजनाओं के क्रियान्वयन के जरिए पैक्स को और अधिक सशक्त और हाई-टेक बनाया जाएगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार ऐसी योजनाओं पर काम कर रही है जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और किसानों को उनके उत्पाद का सीधा और वाजिब मुनाफा मिले। नीति आयोग के सहयोग से इन योजनाओं को और अधिक प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।