कुंदन कुमार/ पटना। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े होने लगे हैं। छात्र हितों के लिए मुखर रहने वाले चर्चित छात्र नेता दिलीप कुमार ने दारोगा भर्ती और बिहार कर्मचारी चयन आयोग (BSSC) की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ, तो छात्र चुप नहीं बैठेंगे और सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।
दारोगा परीक्षा परिणाम पर गंभीर सवाल
दिलीप कुमार ने हाल ही में जारी हुए दारोगा परीक्षा के रिजल्ट को ‘संदेह के घेरे’ में बताया है। उन्होंने आपत्ति जताते हुए कहा कि परिणाम में केवल रोल नंबर दर्शाए गए हैं, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह गायब है। परीक्षा के बाद न तो आंसर की जारी की गई और न ही अभ्यर्थियों को उनके प्राप्तांक बताए गए। इस अपारदर्शी प्रक्रिया के कारण अभ्यर्थियों के बीच भारी असंतोष है और वे धांधली के गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
BSSC की कार्यशैली और अधर में लटका भविष्य
सिर्फ दारोगा भर्ती ही नहीं, दिलीप कुमार ने BSSC की सुस्त रफ्तार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में आयोजित की गई परीक्षाओं का परिणाम अब तक लंबित है। रिजल्ट जारी करने में हो रही यह अत्यधिक देरी लाखों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। उन्होंने अंदेशा जताया है कि जिस तरह की गोपनीयता बरती जा रही है, उससे BSSC के आगामी परिणामों में भी भारी गड़बड़ी हो सकती है।
आर-पार की लड़ाई का ऐलान
छात्र नेता ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है जब सरकार को इन विसंगतियों पर संज्ञान लेना चाहिए। उन्होंने मांग की कि परीक्षा प्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता लाई जाए, कार्बन कॉपी और आंसर की अनिवार्य रूप से दी जाए। दिलीप कुमार ने दो टूक शब्दों में कहा, अगर सरकार ने छात्रों की सुध नहीं ली और परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की, तो प्रदेश का युवा एक बार फिर सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होगा।
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