बीजापुर। गीदम-बीजापुर मार्ग पर गुमरगुंडा के पास हुई दुर्घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। क्या जंगल अब वन्यजीवों के लिए सुरक्षित नहीं रहे? सड़क पार कर रहे हिरण को तेज रफ्तार बाइक ने टक्कर मार दी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। इस हादसे में बाइक चालक भी घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए गीदम ले जाया गया। गर्मी बढ़ते ही पानी की तलाश में वन्यजीव जंगलों से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में सड़कें उनके लिए मौत का रास्ता बनती जा रही है। हर साल जलस्रोत विकसित करने के दावे किए जाते हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही नजर आती है। जंगलों में पर्याप्त पानी नहीं होने से जानवर आबादी और सड़कों की ओर रुख कर रहे हैं। इससे दुर्घटनाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। वन विभाग की योजनाओं पर अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोग भी इसे बड़ी लापरवाही मान रहे हैं। जरूरत है जमीनी स्तर पर प्रभावी काम की। ताकि वन्यजीवों को जंगल में ही सुरक्षित वातावरण मिल सके। और इस तरह की घटनाओं पर लगाम लग सके।

जगदलपुर – उड़ान से पहले ही टूटा हवाई सपना

जगदलपुर। बस्तर में हवाई कनेक्टिविटी को लेकर एक बार फिर निराशा हाथ लगी है। रायपुर सेवा शुरू होने से पहले ही दिल्ली उड़ान बंद होने की कगार पर है। एलायंस एयर को वीजीएफ नहीं मिलने से 23 मार्च आखिरी उड़ान तय मानी जा रही है। जबलपुर और बिलासपुर सेवाओं पर भी असर पड़ेगा। पहले हफ्ते में दो दिन चलने वाली सेवा अब एक दिन तक सिमट गई थी और अब पूरी तरह बंद होने की स्थिति बन गई है। बजट में नई उम्मीदें दिखाई गई थीं, लेकिन जमीनी स्थिति उलट नजर आ रही है। पर्यटन को बढ़ावा देने की बातों के बीच यह फैसला बड़ा झटका है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रियता पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोग पूछ रहे हैं कि आखिर आवाज कौन उठाएगा? मां दंतेश्वरी एयरपोर्ट से कनेक्टिविटी फिर कमजोर हो रही है। बस्तर की उड़ान अब फिर अनिश्चितता में है। और विकास के दावे सवालों के घेरे में आ गए हैं।

जगदलपुर – नवरात्रि में सड़कों पर उतरी मातृशक्ति

जगदलपुर। हिंदू नववर्ष और नवरात्रि के साथ शहर में नारी शक्ति का अनोखा रूप देखने को मिला। महिलाओं ने स्कूटी रैली निकालकर समाज को एक मजबूत संदेश दिया। साफा बांधे सैकड़ों महिलाएं शहर की सड़कों पर एकजुट नजर आईं। जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयकारों से माहौल गूंज उठा। रैली विभिन्न प्रमुख मार्गों से होते हुए दंतेश्वरी मंदिर पहुंची। लोगों ने जगह-जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। यह आयोजन केवल धार्मिक नहीं, सामाजिक संदेश भी था। महिलाओं ने समान सम्मान और भागीदारी की बात कही। नई पीढ़ी को संस्कृति और सुरक्षा का संदेश दिया गया। चार किलोमीटर की यह रैली एकजुटता का प्रतीक बनी। शहर पहले से ही भगवा रंग में रंगा नजर आया। मातृशक्ति ने दिखा दिया कि अब वे हर मोर्चे पर आगे हैं। और समाज में अपनी मजबूत भूमिका निभा रही हैं।

बस्तर – पहली आंधी में ही बिजली व्यवस्था बेपटरी

बस्तर। मौसम की पहली तेज आंधी और बारिश ने बिजली व्यवस्था की पोल खोल दी। मेंटेनेंस के दावों के बावजूद शहर में घंटों बिजली गुल रही। पिछले तीन दिनों से बदलते मौसम के बीच हालात बिगड़ते नजर आए। जैसे ही अंधड़ शुरू हुआ, आधे शहर की बिजली चली गई। और बहाल होने में भी लंबा समय लग गया। लोगों को अंधेरे में रात गुजारनी पड़ी। विद्युत कंपनी के खिलाफ लोगों में नाराजगी बढ़ गई है। कहा जा रहा है कि बार-बार कटौती के बाद भी सुधार नहीं दिख रहा। गर्मी के दिनों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है। हर साल ऐसे हालात दोहराए जाते हैं। सवाल है कि तैयारी आखिर किस बात की होती है? लोग अब स्थायी समाधान की मांग कर रहे हैं। ताकि मौसम बदलते ही व्यवस्था न चरमराए।

आस्था और इतिहास का संगम: चपका की पहचान

बस्तर। नवरात्रि के बीच बस्तर की धार्मिक विरासत फिर चर्चा में है। मारकंडी नदी किनारे स्थित चपका गांव आस्था का केंद्र बना हुआ है। यहीं महान ऋषि मार्कंडेय की तपोस्थली मानी जाती है। दुर्गा सप्तशती जैसे ग्रंथ की रचना यहीं से जुड़ी है। पौराणिक मान्यता के अनुसार शिव ने यहीं उन्हें यम से बचाया था। आज भी यहां उनकी धूनी और प्रतिमा मौजूद है। प्राकृतिक जलकुंड और दुर्लभ मूर्तियां इस स्थान को खास बनाती हैं। भगवान जगन्नाथ और दुर्गा मंदिर भी यहां आकर्षण का केंद्र हैं। हर साल रथयात्रा और महाशिवरात्रि मेला लगता है। यह स्थल धार्मिक के साथ सांस्कृतिक पहचान भी है। बस्तर की परंपरा और इतिहास यहां जीवंत दिखता है। नवरात्रि में यहां श्रद्धालुओं की आस्था और बढ़ जाती है। चपका आज भी आध्यात्म और प्रकृति का अनोखा संगम है।

जगदलपुर – गौरैया गायब, संतुलन पर खतरा

जगदलपुर। विश्व गौरैया दिवस पर एक चिंता सामने आई है। कभी घर-आंगन में चहचहाने वाली गौरैया अब गायब हो रही है। शहरीकरण और प्रदूषण इसका बड़ा कारण बन रहा है। बस्तर में भी इसकी संख्या तेजी से घटी है। गौरैया पारिस्थितिक संतुलन का अहम हिस्सा है। लेकिन अब यह बिरले ही नजर आती है। मोबाइल टावर, कंक्रीट और पेड़ों की कमी इसका कारण हैं। लोगों में जागरूकता की कमी भी एक वजह है। छोटे प्रयासों से इसे बचाया जा सकता है। जैसे घरों में घोंसले और पानी की व्यवस्था। यह दिन संरक्षण का संदेश देता है। ताकि आने वाली पीढ़ी इसे देख सके। वरना यह सिर्फ किताबों तक सीमित रह जाएगी।

सुकमा – ताड़मेटला में पहली बार पहुंचा प्रशासन

सुकमा। कभी नक्सल प्रभाव के कारण अलग-थलग रहा ताड़मेटला अब बदलाव की ओर बढ़ रहा है। पहली बार कलेक्टर ने गांव पहुंचकर सीधे ग्रामीणों से संवाद किया। वर्षों की उपेक्षा के बाद प्रशासनिक मौजूदगी ने भरोसा जगाया है। तुरंत 15 लाख रुपये पंचायत को जारी किए गए। पेयजल, सड़क और आवास जैसी जरूरतों पर फोकस किया गया। एक सप्ताह में पानी पहुंचाने का लक्ष्य तय हुआ है। पहले जहां अधिकारी पहुंचने से कतराते थे, अब हालात बदल रहे हैं। ग्रामीणों ने पहली बार सीधी सुनवाई का अनुभव किया। सरकार की योजनाओं की जानकारी भी दी गई। विकास की जिम्मेदारी में ग्रामीणों को भी भागीदार बनाया गया। यह पहल भरोसे की नई शुरुआत मानी जा रही है। ताड़मेटला अब उपेक्षा से विकास की ओर बढ़ रहा है। और प्रशासनिक पहुंच का नया अध्याय लिख रहा है।

बीजापुर – छात्राओं के गर्भवती मामले में ‘अर्धसत्य’ का खुलासा

बीजापुर। गंगालूर के पोटाकेबिन स्कूल से जुड़ा मामला नया मोड़ लेता दिख रहा है। तीन छात्राओं के गर्भवती होने की खबर को जांच में ‘अर्धसत्य’ बताया गया। सर्व आदिवासी समाज की टीम ने मौके पर जाकर जांच की। पता चला कि छात्राएं पहले से स्कूल से अनुपस्थित थीं और वर्तमान में अपने-अपने ससुराल में रह रही हैं। परीक्षा के दौरान गांव में चर्चा के बाद मामला सामने आया। जांच टीम ने जल्दबाजी में निष्कर्ष से बचने की बात कही है। पूरे मामले की विस्तृत जांच अभी जारी है। समाज ने जिम्मेदारी से तथ्य सामने रखने की बात कही। इस खुलासे के बाद कई भ्रम दूर हुए हैं लेकिन पूरी सच्चाई सामने आना अभी बाकी है। प्रशासन और समाज दोनों नजर बनाए हुए हैं, ताकि सही तथ्य सामने आ सकें।

दंतेवाड़ा – नशे में ड्राइविंग पर सख्ती, खतरा बरकरार

दंतेवाड़ा। भांसी पुलिस ने यातायात नियम तोड़ने वालों पर सख्त कार्रवाई की है। दो ट्रक चालकों से कुल 23 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। दोनों को नशे में वाहन चलाते पकड़ा गया था। न्यायालय में पेश कर कार्रवाई की गई। लेकिन इसके बावजूद शहर में खतरा बना हुआ है। भारी वाहन अब भी तेज रफ्तार से गुजर रहे हैं। स्थानीय लोग बायपास की मांग कर रहे हैं। क्योंकि पूरा ट्रैफिक शहर के भीतर से गुजरता है। स्कूली बच्चे और आम लोग जोखिम में रहते हैं।
पुलिस लगातार अभियान चला रही है। लेकिन स्थायी समाधान की जरूरत महसूस हो रही है। लोगों ने सख्ती और निगरानी बढ़ाने की मांग की है। ताकि हादसों को रोका जा सके।

दंतेवाड़ा – भक्ति, भीड़ और व्यवस्था का संतुलन

दंतेवाड़ा। मां दंतेश्वरी शक्तिपीठ में चैत्र नवरात्रि की भव्य शुरुआत हुई। पहले दिन ही हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। विधि-विधान से कलश स्थापना और पूजा-अर्चना की गई। मंदिर को फूलों और रोशनी से आकर्षक रूप दिया गया है। भीषण गर्मी को देखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। टेंट, कूलर, पेयजल और बैरिकेडिंग की सुविधा दी गई। सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए भी अलग प्रबंध किए गए हैं। इस बार सांस्कृतिक कार्यक्रम सीमित रखे गए हैं। भक्तों के लिए वीआईपी दर्शन और विशेष सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। हजारों ज्योति कलश प्रज्ज्वलित कर आस्था प्रकट की जा रही है। पूरा शहर भक्ति के रंग में डूबा नजर आ रहा है। नवरात्रि के साथ आध्यात्मिक माहौल चरम पर है और श्रद्धालुओं की आस्था लगातार बढ़ रही है।