Rajasthan Congress News: राजस्थान की राजनीति में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने संगठन को पाताल तक ले जाने के लिए एक बेहद आक्रामक फैसला लिया है। पहली बार ऐसा हो रहा है कि पार्टी सीधे ग्राम पंचायत स्तर पर अपनी पूरी कार्यकारिणी खड़ी करने जा रही है। दरअसल, दिल्ली से लेकर जयपुर तक मंथन के बाद यह साफ हो गया है कि अब सिर्फ जिला और ब्लॉक अध्यक्षों के भरोसे जंग नहीं जीती जा सकती।

गांव से लेकर शहर तक बिछेगा नेटवर्क

बता दें कि इस नए अभियान के तहत पार्टी का फोकस ‘हर हाथ को काम और हर बूथ पर नाम’ वाली नीति पर है। सूत्रों ने बताया कि कांग्रेस अब केवल बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहना चाहती, बल्कि दूर-दराज की ढाणियों और शहरी गलियों के आखिरी मकान तक अपनी पहुंच बनाना चाहती है। ग्राम पंचायतों में टीम बनने से सीधे ग्रामीणों से जुड़ाव बढ़ेगा, वहीं शहरी वार्डों में सक्रियता बढ़ाने का जिम्मा नई टीम को दिया जाएगा।

5 लाख सिपाहियों की होगी भर्ती

गौरतलब है कि प्रदेश नेतृत्व ने इस मेगा प्लान के जरिए 5 लाख से ज्यादा पदाधिकारियों को संगठन की मुख्य धारा से जोड़ने का लक्ष्य रखा है। ग्राम पंचायत स्तर पर करीब 3 लाख नए चेहरे जिम्मेदारी संभालेंगे। शहरी वार्ड में 2 लाख से अधिक कार्यकर्ताओं को पद दिया जाएगा। हर पंचायत और वार्ड में अध्यक्ष समेत 21 सदस्यीय कार्यकारिणी होगी।

जिलाध्यक्षों को 19 अप्रैल का अल्टीमेटम

ग्राउंड सूत्रों के अनुसार, पीसीसी ने सभी जिलाध्यक्षों को सख्त हिदायत दी है कि 19 अप्रैल तक यह काम हर हाल में पूरा हो जाना चाहिए। राज्य की 14,726 ग्राम पंचायतों और 10,245 शहरी वार्डों में अध्यक्षों की नियुक्ति की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।

निकाय और पंचायत चुनावों पर नजर

दरअसल, जानकारों का मानना है कि यह सब आने वाले पंचायत और निकाय चुनावों की बिसात बिछाई जा रही है। पार्टी चाहती है कि चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही उसके पास हर गली और हर मोहल्ले में एक मजबूत ‘वोट बैंक मैनेजर’ तैयार रहे।

इस फैसले से कांग्रेस के उन पुराने कार्यकर्ताओं में नई जान आ गई है जो लंबे समय से किसी जिम्मेदारी के इंतजार में थे। गांव के चौपालों पर अब फिर से राजनीतिक चर्चाएं तेज होने लगी हैं। हालांकि, इतनी बड़ी फौज को संभालना और उनके बीच आपसी तालमेल बिठाना कांग्रेस के लिए एक बड़ी चुनौती भी होगी। अगर यह प्लान सफल रहा, तो प्रदेश की सियासत में बड़ा उलटफेर तय है।

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