जगदलपुर। बस्तर में प्राकृतिक संसाधनों की लूट पर अब प्रशासन ने बड़ा और निर्णायक प्रहार किया है, जहां कलेक्टर के सख्त निर्देश के बाद खनिज विभाग ने अंतर्राज्यीय सीमा पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए रेत माफियाओं के नेटवर्क को हिला दिया है। भस्कली नदी के बेलगांव और बनियागांव क्षेत्र में बड़े पैमाने पर मशीनों से हो रहे अवैध उत्खनन पर अचानक दबिश दी गई, जहाँ नदी के बीचों-बीच पोकलेन मशीन से खुदाई करते आरोपियों को रंगे हाथों पकड़ा गया और मशीन को मौके पर ही सील कर दिया गया। वहीं अवैध परिवहन में लगे एक हाईवा वाहन को भी जब्त कर नगरनार थाना में रखा गया है। अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी और सीमावर्ती इलाकों में निगरानी और सख्त की जाएगी। इस ऑपरेशन ने साफ कर दिया है कि अब जिले में संसाधनों की लूट किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
625 साल की रंग परंपरा आज भी जीवंत
जगदलपुर। बस्तर की पहचान केवल आदिवासी संस्कृति तक सीमित नहीं बल्कि यहाँ की समृद्ध रंगमंच परंपरा भी इसकी आत्मा है, जो पिछले करीब 625 वर्षों से लगातार जीवित है। राजा भैराज देव के समय नाट्य मंचन ने सांस्कृतिक नवजागरण का रूप लिया, जिसके बाद 1914 में राजा रुद्र प्रताप देव के संरक्षण में पहली रामलीला पार्टी का गठन हुआ और फिर अंग्रेज अधिकारियों की पहल से थिएटर संस्कृति को और विस्तार मिला। 1921 के आसपास शुरू हुआ मंचन आगे चलकर आर्य बांधव थिएटर बना, जहाँ राजा हरिश्चंद्र और अमर सिंह राठौर जैसे नाटक खेले गए। जगदलपुर का कुंवर भवन उस दौर में रंगमंच का केंद्र रहा। 1929 और 1940 के दशक में कई नाटक मंडलियों ने इस परंपरा को नई ऊंचाई दी, जिसमें हास्य व्यंग्य और सामाजिक संदेश का समावेश रहा। रथयात्रा और दशहरा जैसे उत्सवों में भी यह परंपरा घुलमिल गई और कलाकार राजदरबार से निकलकर जनमानस तक पहुंचे, जिससे यह विरासत आज भी जीवंत बनी हुई है।

एक ज्योत में हजारों आस्था, पर्यावरण का संदेश
बस्तर। जब आस्था जिम्मेदारी से जुड़ती है तो समाज में बदलाव की नई मिसाल बनती है और बस्तर में यही तस्वीर अब साफ नजर आ रही है जहाँ माँ छिंदावाली काली मंदिर और गायत्री शक्तिपीठ में वर्षों से एक अनोखी परंपरा निभाई जा रही है जिसमें हजारों श्रद्धालुओं के नाम से केवल एक ही सामूहिक मनोकामना ज्योत प्रज्वलित होती है जिससे न केवल आर्थिक बोझ कम होता है बल्कि पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलती है वर्ष 1998 में शुरू हुई इस पहल में शुरुआत में केवल 19 लोग जुड़े थे लेकिन अब यह संख्या 3 हजार के पार पहुंच चुकी है मंदिर प्रबंधन श्रद्धालुओं के नाम प्रदर्शित कर पारदर्शिता बनाए रखता है वहीं 2009 से गायत्री शक्तिपीठ में बिना किसी निर्धारित राशि के यह परंपरा जारी है जहाँ आस्था का मूल्य भावना से तय होता है हर साल नए श्रद्धालु इस मुहिम से जुड़ रहे हैं और चैत्र नवरात्र में भी सैकड़ों नामों से एक ही ज्योत प्रज्वलित हो रही है यह पहल अब आस्था और पर्यावरण संतुलन का मजबूत मॉडल बन चुकी है।
अंधेरे से उजाले तक ललित की नई जिंदगी
जगदलपुर। बस्तर के एक छोटे से गांव पराली से आई यह कहानी उम्मीद की नई रोशनी दिखाती है जहाँ 9 वर्षीय ललित जन्म से मोतियाबिंद से जूझ रहा था और उसकी दुनिया अंधेरे में कैद थी पहचान होने के बावजूद परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार नहीं हो पा रहे थे क्योंकि डर और संशय ने उन्हें रोक रखा था लेकिन प्रशासन की पहल पर आयोजित स्वास्थ्य शिविर में डॉक्टरों ने स्थिति को गंभीरता से समझा और नेत्र सहायक अधिकारी की सक्रियता ने परिवार का भरोसा जीता लगातार समझाइश के बाद परिजन ऑपरेशन के लिए तैयार हुए और ललित को जिला अस्पताल रेफर किया गया अब उसके जीवन में रोशनी की नई उम्मीद जगी है यह कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन और पहल से किसी की जिंदगी पूरी तरह बदली जा सकती है।
नन्हें परिंदे में आग ने खोली सुरक्षा व्यवस्था की पोल
जगदलपुर के पातररास स्थित संस्था नन्हें परिंदे में लगी आग ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जहाँ स्टोर रूम से शुरू हुई आग ने देखते ही देखते विकराल रूप ले लिया और अधीक्षिका कक्ष तक पहुंच गई, जिससे राशन फर्नीचर और दैनिक उपयोग की सामग्री पूरी तरह जलकर राख हो गई। घटना के समय अधीक्षिका मौजूद नहीं थी, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक भारी नुकसान हो चुका था। प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई जा रही है। इस घटना ने संस्था में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोल दी है और अब प्रशासन ने जांच के बाद कारण स्पष्ट करने की बात कही है।
एंबुलेंस नहीं मिली, शव वाहन बना सहारा
जगदलपुर। बस्तर में स्वास्थ्य व्यवस्था की हकीकत एक सड़क हादसे में सामने आ गई, जहाँ लंजोड़ा गांव में देर रात बाइक दुर्घटना में एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया और मदद के लिए 108 एंबुलेंस को सूचना देने के बावजूद समय पर सहायता नहीं मिली। करीब एक घंटे तक घायल सड़क किनारे तड़पता रहा, जिसके बाद गुजरते शव वाहन से उसे जिला अस्पताल पहुंचाया गया। घायल नितेंद्र जैन का एक हाथ बुरी तरह जख्मी है और उसकी हालत गंभीर बनी हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाइक डिवाइडर से टकरा गई थी। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, जहाँ एक घंटे की देरी जानलेवा साबित हो सकती थी।

