अमित पांडेय, खैरागढ़। छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक केंद्र के रूप में पहचान बना चुके इन्दिरा सिंह कला संगीत विश्वविद्यालय में विश्व रंगमंच दिवस पर ऐसा आयोजन हुआ, जिसने रंगमंच की असली ताकत को सामने ला दिया. एक तरफ महाभारत का भावनात्मक द्वंद्व, तो दूसरी ओर आज के समाज का अकेलापन.

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यह विश्वविद्यालय पहले भी बड़े रंगमंच आयोजनों का केंद्र रहा है और राष्ट्रीय स्तर के महोत्सवों की मेजबानी कर चुका है, जिससे यहां की रंगमंच परंपरा मजबूत मानी जाती है. विश्व रंगमंच दिवस के खास मौके पर नाट्य विभाग के विद्यार्थियों ने दो अलग-अलग विषयों पर आधारित नाटक प्रस्तुत किए ‘महारथी’ और ‘नींद क्यों रात भर नहीं आती’. दोनों नाटक अलग-अलग दौर और भावनाओं को छूते हुए भी एक साझा सवाल छोड़ गए, इंसान के भीतर चल रहा संघर्ष.

सबसे पहले मंच पर आए कलाकार भैरवी साहू, अंकित सिंह, हर्षगिरी भट्ट और आकांक्षी मेश्राम, जिन्होंने ‘महारथी’ के जरिए कर्ण और कुंती के बीच का वह दर्दनाक संवाद जीवंत कर दिया, जिसे महाभारत का सबसे भावुक क्षण माना जाता है. मां अपने बेटे से युद्ध छोड़ने की विनती करती है, लेकिन कर्ण दोस्ती और कर्तव्य के बीच फंसा हुआ है. कलाकारों की आवाज़, भाव और संवाद अदायगी ने दर्शकों को सीधे उस दौर में पहुंचा दिया.

इसके बाद मंच संभाला डॉली अहिरवार, हर्षगिरी भट्ट, ध्रुव सिंह, दिशा चतुर्वेदी और यश बंसल ने. इन कलाकारों ने प्रसिद्ध लेखक सुरेन्द्र वर्मा के नाटक ‘नींद क्यों रात भर नहीं आती’ को पेश किया. यह कहानी एक ऐसी युवती की है, जिसे रात भर नींद नहीं आती और वह अनजान लोगों को फोन कर अपने भीतर की खालीपन को भरने की कोशिश करती है.

हर कॉल के साथ उसकी बेचैनी, डर और अकेलापन सामने आता है और यही आज के समाज की सबसे बड़ी सच्चाई भी है. दोनों नाटकों की खास बात यह रही कि एक ने इतिहास के जरिए भावनाओं को छुआ, तो दूसरे ने वर्तमान की हकीकत को आईना दिखाया. संगीत, प्रकाश और मंच सज्जा ने इन प्रस्तुतियों को और असरदार बना दिया.

कार्यक्रम में कुलपति प्रो. लवली शर्मा ने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि रंगमंच केवल अभिनय नहीं, बल्कि समाज को समझने और समझाने का माध्यम है. वहीं विभागाध्यक्ष प्रो. राजन यादव ने विद्यार्थियों के प्रयास को सराहते हुए कहा कि कठिन समय में भी ऐसी प्रस्तुति देना उनकी लगन को दिखाता है. कुल मिलाकर, यह आयोजन सिर्फ नाटक का मंचन नहीं था, बल्कि दर्शकों के लिए एक अनुभव बन गया, जहां उन्होंने इतिहास का दर्द भी महसूस किया और आज के अकेलेपन की सच्चाई भी समझी.