Lalluram Desk. हनुमान जयंती के दिन बजरंगबली के भक्ति उनकी विशेष पूजा, अर्चना करते हैं. इस दिन संकटमोचन को प्रसन्न करने के लिए घरों और मंदिरों में सुंदरकांड का पाठ किया जाता है. सुंदरकांड, रामचरितमानस का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, जिसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की थी. लेकिन सुंदरकांड का पाठ करने की भी कुछ नियम होते हैं.

सुंदरकांड का पाठ करने से पहले स्नान करना जरूरी होता है. इसके बाद साफ कपड़े पहनकर हनुमान जी के सामने बैठकर विधिपूर्वक पाठ करना चाहिए. पाठ से एक दिन पहले ब्रह्मचर्य व्रत का पालन, सात्विक भोजन और सात्विक विचार रखना भी आवश्यक माना गया है.

मन और तन की शुद्धि जरूरी

सुंदरकांड के पाठ में समय का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार, सुंदरकांड का पाठ सुबह के समय करना चाहिए या शाम 4 बजे के बाद करना उचित बताया गया है. दोपहर 12 बजे के बाद पाठ बहुत ज्यादा शुभकारी नहीं बताया गया है. इस बात का भी ध्यान रहे पाठ करते समय इसे बीच में अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए. न ही किसी से बातचीत करनी चाहिए. पूरा ध्यान केवल पाठ पर ही केंद्रित रखना चाहिए.

सामूहिक पाठ भी किया जा सकता है

सुंदरकांड का पाठ 11, 21, 31 या 41 दिनों तक नियमित रूप से करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है l संकट दूर होते हैं. समूह में भी इसका पाठ किया जा सकता है, जिसे अधिक फल दायी माना जाता है. पाठ पूर्ण होने के बाद हनुमान जी को फल, बूंदी या बेसन के लड्डू का भोग लगाना चाहिए. इसके साथ ही आरती करना और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करना आवश्यक होता है. हनुमान जयंती पर इन नियमों का पालन करते हुए किया गया सुंदरकांड पाठ बजरंगबली की कृपा प्रदान करेगा.

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