नई दिल्ली। राजधानी में किफायती आवास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब दिल्ली मेट्रो (Delhi Metro), नमो भारत कॉरिडोर और रेलवे स्टेशनों के आसपास 500 मीटर के दायरे में सस्ते घर बनाने का रास्ता साफ हो गया है। केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल (Manohar Lal Khattar) ने बताया कि इसके लिए पारगमन उन्मुख विकास (TOD) नीति और शुल्क विनियम, 2026 में बदलाव किया गया है। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य मेट्रो कॉरिडोर के साथ योजनाबद्ध, टिकाऊ और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े आवासीय विकास को बढ़ावा देना है।
राजधानी में किफायती आवास को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार द्वारा संशोधित पारगमन उन्मुख विकास (TOD) नीति का दायरा अब और व्यापक हो गया है। केंद्रीय मंत्री ने बताया कि यह अवधारणा पहले ही मास्टर प्लान 2021 Delhi में शामिल की जा चुकी थी, जिसे अब और प्रभावी रूप से लागू किया जा रहा है। नई नीति के तहत Delhi Metro और आरआरटीएस (नमो भारत) कॉरिडोर के 500 मीटर के दायरे में उच्च घनत्व (हाई डेंसिटी) और मिश्रित उपयोग (मिक्स्ड-यूज) वाले विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका उद्देश्य आवास, कार्यालय, दुकानें और अन्य सुविधाओं को एक ही क्षेत्र में विकसित करना है, ताकि लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े।
इस पहल से लोगों के घर से सार्वजनिक परिवहन तक पहुंच आसान होगी, जिससे यातायात दबाव कम होगा और शहरी जीवन अधिक सुविधाजनक बनेगा। साथ ही, बड़े पैमाने पर किफायती आवास (Affordable Housing) तैयार किए जा सकेंगे। सरकार के अनुसार, इस नीति के लागू होने से लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जिसमें मेट्रो कॉरिडोर के दोनों ओर 500 मीटर और आरआरटीएस/रेलवे स्टेशनों के आसपास का दायरा शामिल है को योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास के लिए खोला जाएगा। इससे दिल्ली में सस्ते घरों की उपलब्धता बढ़ेगी और शहरी ढांचा अधिक संगठित रूप में विकसित हो सकेगा।
नई नीति के दायरे में लाया गया
नई नीति के तहत कुल 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में विकास का रास्ता खुला है, जिसमें से करीब 80 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र जो पहले TOD नीति के दायरे में नहीं था अब इसमें जोड़ा गया है। इस क्षेत्र में भूमि पूलिंग, कम घनत्व वाले आवासीय इलाके और अनधिकृत कॉलोनियां शामिल हैं। पहले ये क्षेत्र TOD नीति से बाहर थे, लेकिन अब इन्हें शामिल करने से Delhi Metro, आरआरटीएस (नमो भारत) और रेलवे स्टेशनों के आसपास योजनाबद्ध विकास और पुनर्विकास को बढ़ावा मिलेगा। इससे मौजूदा और प्रस्तावित कॉरिडोर के साथ बेहतर शहरी ढांचा विकसित किया जा सकेगा।
TOD नीति के प्रमुख प्रावधान
छोटे भूखंडों को भी मौका
अब 2000 वर्ग मीटर तक के छोटे प्लॉट्स पर भी TOD प्रावधानों के तहत विकास संभव होगा, जिससे छोटे डेवलपर्स और जमीन मालिकों को भी लाभ मिलेगा।
एफएआर (FAR) में बढ़ोतरी
2000 वर्ग मीटर या उससे बड़े भूखंडों पर, यदि 18 मीटर चौड़ी सड़क उपलब्ध है, तो TOD क्षेत्र में अधिकतम 500 FAR तक की स्वीकृति दी जा सकती है।
आवास के लिए 65% आरक्षण अनिवार्य
कुल स्वीकृत FAR का 65 फीसदी हिस्सा आवासीय उपयोग के लिए आरक्षित होगा। इसमें 100 वर्ग मीटर (या उससे कम) के छोटे फ्लैट भी शामिल होंगे, जिससे मिडिल और लो-इनकम वर्ग को राहत मिलेगी।
35% में सुविधाएं और कॉमर्शियल उपयोग
शेष 35 फीसदी FAR में से 10 फीसदी हिस्सा आवासीय क्षेत्र के भीतर वाणिज्यिक और अन्य सुविधाओं (जैसे दुकानें, सेवाएं आदि) के लिए उपयोग किया जाएगा।
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