दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने बुधवार (8 अप्रैल) को पत्रकार राणा अय्यूब (Rana Ayyub) द्वारा 2013 और 2017 के बीच किए गए कुछ ट्वीट्स पर कड़ी आपत्ति जताई। ये ट्वीट्स हिंदू देवी-देवताओं और राइट विंग विचारक विनायक सावरकर से संबंधित थे। सुनवाई के दौरान जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए ये पोस्ट बेहद अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक हैं।

दिल्ली हाई कोर्ट ने पत्रकार राणा अय्यूब द्वारा 2013 और 2017 के बीच किए गए ट्वीट्स पर कड़ी आपत्ति जताई। ये ट्वीट्स हिंदू देवी-देवताओं और राइट विंग विचारक विनायक सावरकर से संबंधित थे। सुनवाई के दौरान जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने कहा कि एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर किए गए ये पोस्ट अत्यंत अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे पोस्ट को देखते हुए तुरंत कार्रवाई जरूरी है। कोर्ट ने एक्स, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वे मिलकर इस मामले में कार्रवाई करें। अदालत ने जोर दिया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और संबंधित प्राधिकरणों को मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि इस प्रकार के भड़काऊ और अपमानजनक पोस्ट से सार्वजनिक शांति को नुकसान न पहुंचे।

अगली सुनवाई 10 अप्रैल को

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने राणा अय्यूब, एक्स, केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और ट्वीट्स को फ़्लैग करने वाली याचिका पर जवाब देने के लिए कहा। सभी पक्षों को अपना जवाब गुरुवार (9 अप्रैल) तक देना होगा। अदालत इस मामले की अगली सुनवाई शुक्रवार (10 अप्रैल) को करेगी।

आदेश में कोर्ट ने क्या कहा

कोर्ट ने आदेश में कहा, “रेस्पोंडेंट्स को निर्देश लेने दें और ज़रूरी काम करने दें। उन्हें कल तक जवाब फाइल करने दें। मामले की सुनवाई परसों हो। रेस्पोंडेंट नंबर 4 (राणा अय्यूब) के बहुत ज्यादा अपमानजनक, भड़काऊ और सांप्रदायिक ट्वीट्स को देखते हुए यह कार्रवाई ज़रूरी है, जिसके आधार पर एक सक्षम कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज की गई है। मामले पर तुरंत विचार करने की जरूरत है। दिल्ली पुलिस का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारी को भी रेस्पोंडेंट नंबर 3 (X Corp) को जरूरी निर्देश भेजने का निर्देश दिया जाता है। दिल्ली पुलिस को भी एक पार्टी बनाया जाए।”

अमिता सचदेवा की याचिका पर सुनवाई

दिल्ली हाई कोर्ट वकील अमिता सचदेवा की याचिका पर सुनवाई कर रहा था। सचदेवा ने पहले राणा अय्यूब के खिलाफ क्रिमिनल एक्शन के लिए साकेत कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनकी शिकायत के आधार पर ट्रायल कोर्ट ने अय्यूब के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया और पुलिस को जांच करने का निर्देश दिया। दिल्ली पुलिस ने बाद में कोर्ट को बताया कि जिन ट्वीट्स की बात हो रही है, वे अब X पर उपलब्ध नहीं हैं।

क्या कहा याचिका में

अमिता सचदेवा ने कहा कि अय्यूब के ट्वीट्स ने हिंदू देवताओं, सीता और राम, वीर सावरकर और हिंदू राष्ट्रवाद का अपमान किया और भारत विरोधी भावनाएं फैलाईं। उन्होंने कहा, “ट्वीट्स का कंटेंट पढ़ने के बाद पिटीशनर जो सनातन धर्म का अनुयायी है, बहुत दुखी है क्योंकि पोस्ट्स में पहली नजर में हिंदू देवताओं और पूजनीय ऐतिहासिक शख्सियतों का अपमान है और ये सांप्रदायिक वैमनस्य को बढ़ावा दे सकते हैं।” सचदेवा ने अपनी पिटीशन में 2013 और 2017 के बीच अय्यूब के किए गए 6 विवादित ट्वीट्स का ज़िक्र किया। दिल्ली पुलिस ने बाद में कोर्ट को बताया कि जिन ट्वीट्स की बात हो रही है, वे अब X पर उपलब्ध नहीं हैं।

राणा अय्यूब के ट्वीट

2013 का ट्वीट: “रावण ने सीता को छुआ तक नहीं, जबकि वह छू सकता था। राम सीता के लिए खड़े नहीं हुए, जबकि उन्हें होना चाहिए था। रावण 1, राम 0।”

अक्टूबर 2014 का ट्वीट: अली सरदार जाफ़री का शेर कोट करते हुए लिखा, “गरीब सीता के घर पे कब तक रहेगी रावण की हुक्मरानी, द्रौपदी का लिबास उसके बदन से कब तक छीना करेगा।”

2015 के ट्वीट्स: “तो वीर सावरकर ने हिंदुत्व राष्ट्रवाद के जरूरी हिस्से के तौर पर रेप की वकालत की।” और “नाथूराम गोडसे का सावरकर के बारे में लिखा पढ़ रही थी और सोच रही थी कि क्या हमें आतंकवादी समर्थक का सम्मान करते रहना चाहिए।”

2016 का ट्वीट: एक लड़के की तस्वीर के साथ लिखा, “प्रिय भारतीय सेना, मुझे लगता है कि यह छोटा बच्चा भारत की आज़ादी के लिए इतना बड़ा खतरा था कि उसे ज़िंदगी भर के लिए अंधा कर दिया गया।”

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