कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। 30 रुपए में इलाज… लाखों लोग रोज इन्हीं डॉक्टरों पर भरोसा कर रहे है। हरियाणा के गांवों की यह सच्चाई चौंकाने वाली है। हरियाणा के गांवों में RMP डॉक्टर लोगों की जरूरत है या फिर मजबूरी, जानिए हकीकत और आंकड़े…
इस विषय पर लल्लूराम डॉट कॉम ने RMP एवं अनुभवी चिकित्सा एसोसिएशन के 22 वर्षों से प्रदेशाध्यक्ष, भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक एवं बोर्ड के चेयरमैन रहे डॉक्टर ऋषिपाल सैनी से सीधी बातचीत की।
सवाल : हरियाणा के गांवों में आज भी लोग RMP डॉक्टरों पर क्यों निर्भर हैं?
जवाब : प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों की कमी है। ग्रामीण स्तर पर तो कमी बहुत ज्यादा है इसलिए ग्रामीणों के पास RMP डॉक्टरों से इलाज करवाने के सिवाय और कोई दूसरा विकल्प नहीं है।
सवाल : क्या ये मजबूरी है या लोगों की आदत बन चुकी है?
जवाब : सरकारी अस्पताल कम है और प्राइवेट अस्पतालों में इलाज महंगे है। छोटी बीमारी के लिए भी मरीजों को महंगे टेस्ट और दवाइयों का बोझ झेलना पड़ता है। RMP डॉक्टर उसी बीमारी को 30 रूपये की तीन खुराक देकर ठीक कर देते है।
सवाल : सरकारी हेल्थ सिस्टम (Primary Health Centres/PHC) कहां फेल हो रहा है?
जवाब : सरकारी अस्पताल कम है। अस्पतालों में स्टाफ की कमी है। स्वास्थ्य केंद्रों में चौबीस घंटे सेवा का कोई व्यवस्था नहीं है। रात में इमरजेंसी के समय मरीज कहा जाएगा।
सवाल : बिना डिग्री इलाज करना क्या मरीजों के लिए खतरा नहीं है?
जवाब : RMP डॉक्टर केवल प्राथमिक उपचार करते है। यदि मरीज सीरियस है तो वे मरीज को बड़े हॉस्पिटल जाने की सलाह देते है। कई बार तो RMP डॉक्टर मरीज को स्वयं हॉस्पिटल लेकर जाते है।
सवाल : क्या गलत इलाज या मौत के केस सामने आते हैं?
जवाब : बड़े हॉस्पिटल्स की तुलना में RMP के इलाज से मौत के मामले बहुत कम है। हमारे साथी ज्यादा रिस्क नहीं लेते। वे केवल प्राथमिक चिकित्सा तक सीमित है। मरीज की गंभीर स्थिति होने पर उसे बड़े हॉस्पिटल जाने की सलाह देते है।
सवाल : RMP डॉक्टर खुद अपनी ट्रेनिंग और ज्ञान को कैसे अपडेट रखते हैं?
जवाब : यह बहुत जरूरी है। सरकार के लिए RMP डॉक्टर्स को सिस्टम से हटा पाना मुश्किल है बल्कि सरकार को इनके लिए ट्रेनिंग की व्यवस्था करनी चाहिए। मनोहर लाल खट्टर की सरकार ने इस दिशा में पहल शुरू की थी और एक ट्रेनिंग सेंटर की अनुमति भी दी थी। लेकिन फिलहाल वह सेंटर बंद है। बल्कि ट्रेनिंग के लिए सरकार को ओर सेंटर खोलने चाहिए।
सवाल : सरकार इन पर कार्रवाई क्यों नहीं कर पाती या नहीं करती?
जवाब : सरकार ऐसा नहीं कर सकती। यदि सरकार ने कार्यवाही करने की कोशिश की तो ग्रामीण जनता सरकार के खिलाफ हो जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र में 75 हजार से अधिक RMP डॉक्टर अपनी सेवाएं दे रहे है। ये मरीजों के दाता है। यही चौबीसों घंटे घर पहुंच सेवा देते है। ऐसे में इनके खिलाफ कार्यवाही करना सरकार को भारी पड़ सकता है।
सवाल : क्या सरकार को RMP डॉक्टरों को regulate (नियमित) करना चाहिए?
जवाब : बिल्कुल करना चाहिए। बल्कि उन्होंने खुद इस दिशा में सरकार से पहल करने का आग्रह किया था। पहल शुरू हुई पर फिलहाल फाइल लटकी है।
सवाल: क्या कोई ऐसा मॉडल हो सकता है, जिसमें इन्हें basic training देकर legal बनाया जाए?
जवाब : सरकार सभी RMP डॉक्टर्स की सूची तैयार करे। फिर उन्हें ट्रेनिंग देकर प्रमाणपत्र जारी करें। आगे और RMP डॉक्टर्स की आवश्यकता ना पड़े इसके लिए अपनी स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाए।
सवाल : 30 रुपये में इलाज कैसे possible है? इसमें क्या compromise होता है? क्या गरीब लोग सिर्फ सस्ता होने के कारण इन्हें चुनते हैं?
जवाब : नहीं इसमें कोई compromise नहीं है। बड़े हॉस्पिटल में इलाज महंगे है। हॉस्पिटल्स की कमाई मोटी है। RMP डॉक्टर कम मार्जन पर काम करते है। 30 रूपये की तीन खुराक में उसे बड़ी मुश्किल से 10 रुपए बचते है।
सवाल : अगर गांवों में अच्छे डॉक्टर आ जाएं, तो क्या RMP सिस्टम खत्म हो जाएगा?
जवाब : हो सकता है। पर फिलहाल दूर दूर तक ऐसी कोई संभावना नजर नहीं आ रही है। ग्रामीण स्तर पर स्वास्थ्य सुविधाओं की भारी कमी है। जिसे तत्काल पूरा कर पाना सरकार के लिए संभव नहीं है।
सवाल : आप लोगों को “झोलाछाप” कहे जाने पर क्या कहना चाहेंगे?
जवाब : बुरा तो लगता है। RMP डॉक्टर अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाते है। इनके बैगर ग्रामीण क्षेत्र में काम नहीं चल सकता। ये सिस्टम का हिस्सा बन चुके है। RMP को झोला छाप कहना मीडिया की उपज है।
सवाल : क्या आप मानते हैं कि आप लोग गांवों में health gap भर रहे हैं?
जवाब : सरकार के पास इतनी बुनियादी सुविधाएं नहीं है कि वे ग्रामीणों को सही इलाज मुहैया करा सके। ग्रामीण क्षेत्र में केवल RMP डॉक्टर्स के भरोसे ही सिस्टम चल रहा है।
सवाल : आपकी सरकार से क्या मांग है? (मान्यता, ट्रेनिंग, लाइसेंस आदि)
जवाब : हमारी सरकार से कोई ज्यादा मांग नहीं है। हम चाहते है कि सभी RMP डॉक्टर्स को पंजीकृत करें, उन्हें ट्रेनिंग दे और प्राथमिक चिकित्सा का प्रमाणपत्र प्रदान करें।
सवाल : क्या ये सच है कि कुछ RMP डॉक्टर बिना जानकारी के risky दवाइयां देते हैं?
जवाब : यह बताना लाजमी है कि ज्यादातर RMP बड़े हॉस्पिटल में काम सीखकर आते है। डॉक्टर की गैर मौजूदगी में वही मरीजों को हैंडल करते है। इसलिए उन्हें पता है कि कौनसी दवाई कितनी रिस्की है।
सवाल : अगर किसी मरीज की जान जाती है, तो जिम्मेदारी कौन लेता है?
जवाब : मै दावे के साथ कह सकता हूं कि बड़े हॉस्पिटल्स की तुलना में RMP के इलाज से मौतें बहुत कम होती है।
सवाल : क्या ये पूरा सिस्टम कानून के खिलाफ नहीं है?
जवाब : गैर कानूनी है। फिर भी काम कर रहे है। इनके बैगर ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाएं पूरी नहीं की जा सकती। सरकार इस बात से भलीभांति परिचित है। इसलिए सरकार चाहकर भी इनके खिलाफ कोई बड़ी कार्यवाही नहीं कर सकती। सरकार को अपनी वोट बैंक का भी खतरा है। RMP के साथ ग्रामीणों की सहानभूति जुड़ी है। यदि सरकार कार्यवाही करेगी तो ग्रामीण भी सरकार के खिलाफ हो जाएंगे।
सवाल : आपके दोबारा चेयरमैन बनने की क्या संभावना है।
जवाब : चेयरमैन नियुक्त करना मुख्यमंत्री के अधिकार क्षेत्र में है। मुझे पद की लालसा नहीं है। मेरा लक्ष्य सभी RMP भाइयों का रजिस्ट्रेशन कराना, उन्हें ट्रेनिंग दिलाना और प्राथमिकी चिकित्सा उपलब्ध कराने का प्रमाणपत्र दिलाना है।
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