आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा (Raghav Chadda) के संसदीय कामकाज को लेकर पार्टी के भीतर ही बहस तेज हो गई है। कुछ नेताओं ने उन पर संसद में प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर न होने और “सॉफ्ट PR” में अधिक सक्रिय रहने के आरोप लगाए हैं। इसी बीच पार्टी की वरिष्ठ नेता आतिशी ने उनके रुख को लेकर सवाल उठाते हुए यहां तक संकेत दिया कि राघव चड्ढा के भारतीय जनता पार्टी (नरेंद्र मोदी) में जाने की संभावना भी हो सकती है।
आवाज उठाई, कीमत चुकाई
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने शुक्रवार को इंस्टाग्राम पर एक वीडियो साझा कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। इस वीडियो का शीर्षक उन्होंने “Voice Raised Price Paid” (आवाज उठाई, कीमत चुकाई) रखा है। इस वीडियो में संसद के भीतर उनके द्वारा विभिन्न मुद्दों पर दिए गए भाषणों और हस्तक्षेपों की क्लिप्स का संकलन दिखाया गया है। वीडियो के जरिए उन्होंने उन आलोचनाओं का जवाब देने की कोशिश की है, जिनमें उनके संसदीय प्रदर्शन और सक्रियता पर सवाल उठाए गए थे।
वीडियो में क्या है खास
संसद में उठाए गए मुद्दों की क्लिप्स का संग्रह, सरकार और नीतियों पर दिए गए भाषणों का प्रदर्शन, आलोचकों के आरोपों पर अप्रत्यक्ष जवाब, “कीमत चुकाने” वाले संदेश के जरिए राजनीतिक संकेत यह पोस्ट ऐसे समय में आई है जब राघव चड्ढा और उनकी पार्टी के कुछ नेताओं के बीच मनमुटाव और असंतोष की चर्चाएं चल रही हैं। हाल के दिनों में उनके राजनीतिक रुख और पार्टी में उनकी भूमिका को लेकर सवाल भी उठे हैं।
मेरा काम ही मेरी तरफ से बोलेगा
उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि जिन लोगों ने उनके कामकाज पर सवाल उठाए हैं, उनसे वह पूरे सम्मान के साथ कहना चाहते हैं कि “मेरा काम ही मेरी तरफ से बोलेगा”। राघव चड्ढा ने पार्टी के भीतर या जुड़े कुछ नेताओं द्वारा लगाए गए आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह संसद में जनता के मुद्दे उठाने गए थे, न कि हंगामा करने के लिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य हमेशा जनहित के मुद्दों को संसद में मजबूती से उठाना रहा है, न कि सिर्फ शोर-शराबा करना।
‘BJP में जा सकते हैं’
आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को पार्टी ने 2 अप्रैल को राज्यसभा में अपने उपनेता के पद से हटा दिया है। यह फैसला ऐसे समय आया है जब पार्टी के भीतर उनके राजनीतिक रुख और संसदीय सक्रियता को लेकर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के कुछ नेताओं का आरोप है कि राघव चड्ढा संसद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ अपेक्षित रूप से आक्रामक भूमिका नहीं निभा रहे हैं। साथ ही उन पर “सॉफ्ट PR” यानी नरम जनसंपर्क के जरिए अपनी छवि मजबूत करने का आरोप भी लगाया गया है। इस विवाद के बीच पार्टी की वरिष्ठ नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी ने यहां तक संकेत दिया है कि राघव चड्ढा के भारतीय जनता पार्टी में जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता, जिससे राजनीतिक अटकलों को और बल मिला है।
डिमोशन को चुपचाप स्वीकार करने के मूड में नहीं
राघव चड्ढा पार्टी द्वारा उपनेता पद से हटाए जाने के बाद आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। पार्टी के इस फैसले को उन्होंने पूरी तरह खारिज करते हुए इसे गलत और आधारहीन बताया है। राघव चड्ढा ने कहा है कि वह संसद में लोगों के मुद्दे उठाने गए थे, न कि हंगामा करने के लिए। उन्होंने यह भी दोहराया कि उनके संसदीय कामकाज पर लगाए जा रहे आरोप निराधार हैं। उपनेता पद से हटाए जाने के बाद से उन्होंने सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट साझा किए हैं, जिनमें संसद में उनके भाषण और हस्तक्षेप दिखाए गए हैं। इन पोस्ट्स को उनके राजनीतिक जवाब के तौर पर देखा जा रहा है।
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