जैसे जैसे पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव नजदीक आ रहा है वैसे वैसे TMC और उनके नेताओं पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। शुक्रवार को मुर्शिदाबाद में मतदाताओं को धमकाने के आरोप में निर्वाचन आयोग के निर्देश पर पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस के नेता राजू मंडल को गिरफ्तार किया है। वहीं अब भवानीपुर विधानसभा सीट से एक विवादित मामला चर्चा में आ गया है, जहां TMC पार्षद पर हिंदू धर्म के प्रचार में बाधा डालने का आरोप लगा है। भवानीपुर के वार्ड 70 के असीम बसु और उनके सपोर्टर्स पर धर्म प्रचार कर रहे साधु-संतों से बदसलूकी का आरोप लगा है।
मुर्शिदाबाद में मतदाताओं को धमकी
चुनाव आयोग के मुताबिक, राजू मंडल ने अपने दल के उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार करते हुए मतदाताओं से कहा कि वे भाजपा को वोट न दें। अगर लोग वोट देने नहीं जाएंगे तो वह उनके घर मिठाई भेज देंगे, लेकिन वोट तृणमूल को ही देना होगा। इस बयान को आयोग ने मतदाताओं को प्रभावित करने और डराने की कोशिश माना।
वहीं दूसरी ओर दक्षिण 24 परगना के कैनिंग में मतदाताओं को धमकाने के आरोप में टीएमसी के पंचायत प्रधान को गिरफ्तार किया गया है। देउली-1 ग्राम पंचायत के प्रमुख हाफिजुल मोल्ला पर आरोप है कि उन्होंने एक जनसभा में मतदाताओं को धमकाते हुए कहा कि वोटों की गिनती के बाद स्टीम रोलर चलेगा।
साधु-संतों को धर्म प्रचार से रोकने का आरोप
जानकारी के मुताबिक, वार्ड 70 में मौजूद खालसा स्कूल के पास एक आश्रम से जुड़े साधु-संत हिंदू धर्म से संबंधित कुछ पर्चे बांट रहे थे। इसी दौरान, वहां कुछ लोगों ने आकर उन्हें रोक दिया और कथित रूप से प्रचार की गतिविधि पर आपत्ति की। इस घटना का CCTV वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
भवानीपुर में TMC कार्यकर्ताओं ने संतों को धमकाया
वहीं भवानीपुर में आरोप है कि यहीं तक ये मामला सीमित नहीं रहा। कुछ लोग साधु-संतों को रोकने के बाद आश्रम तक भी पहुंच गए, जहां कथित तौर पर टीएमसी से जुड़े वर्कर्स ने साधु और आश्रम के लोगों को धमकाने का काम भी किया। इस पूरी घटना को लेकर नाराजगी नजर आ रही है और धार्मिक आजादी से भी जोड़कर इसे देखा जा रहा है।
TMC या पुलिस की तरफ से नहीं आई कोई प्रतिक्रिया
हालांकि, इस केस में अब तक आधिकारिक रूप से पुलिस या प्रशासन की तरफ से कोई बयान सामने नहीं आया है। वहीं, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी तक नहीं की जा सकी है। दूसरी तरफ, सत्तारूढ़ ममता बनर्जी की पार्टी TMC की तरफ से भी इस पर कोई साफ प्रतिक्रिया नहीं दी गई है।
यह मामला ऐसे वक्त में हुआ है, जब पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव है और देशभर में धार्मिक आजादी व अभिव्यक्ति के अधिकार को लेकर बहस जारी है। हालांकि, अब देखना होगा कि पुलिस प्रशासन इस केस में क्या एक्शन लेता है और आरोपों की हकीकत क्या है। फिलहाल, स्थानीय लोगों की नजरें पुलिस प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
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