दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विसेस इंटेलिजेंस (ISI) और बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKL) के स्पॉन्सर्ड टेरर, आर्म्स और जासूसी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है. ये टेरर मॉड्यूल देश के कई राज्यों में फैला हुआ था. पुलिस ने इस गैंग के 11 आरोपियों को पंजाब और दिल्ली से गिरफ्तार किया है. पुलिस की स्पेशल का दावा है कि पकड़े गए आरोपी पूरे देश को ग्रेनेड अटैक से दहलाने की साजिश रच रहे थे. फिलहाल पुलिस ने आरोपियों से पूछताछ शुरू कर दी है.
जानकारी के अनुसार, पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की ओर से संचालित यह गिरोह कितना खतरनाक था इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कई फौजी और रक्षा ठिकानों का लाइव टेलिकास्ट पाकिस्तान में कर दिया था. गिरोह के शातिर सदस्यों द्वारा पंजाब, राजस्थान, जम्मू-कश्मीर समेत कई राज्यों में संवेदनशील सैन्य ठिकानों के पास सोलर पैनल से चलने वाले सीसीटीवी कैमरा लगाए गए थे. पिछले दिनों गाजियाबाद में भी एक ऐसे ही बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ था.
बब्बर खालसा से जुड़ा गिरोह
इस बड़े ऑपरेशन के तहत की गई छापेमारी के दौरान गिरफ्तार सभी 11 आरोपी प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा से जुड़े हुए हैं. पुलिस अधिकारियों ने बताया कि मॉड्यूल जासूसी, हथियारों की तस्करी, महत्वपूर्ण रक्षा ठिकानों की टोही और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करने में जुटा था. जांच में पता चला कि आरोपियों ने सोलर पावर से संचालित और SIM लगे 9 सीसीटीवी कैमरे महत्वपूर्ण रक्षा ठिकानों के पास लगाए थे. खासकर उन इलाकों में जहां सेना और अर्धसैनिकबलों की अधिक आवाजाही होती है.
अडिशनल कमिश्नर ऑफ पुलिस (स्पेशल सेल) प्रमोद कुशवाह ने कहा, ‘इन ठिकानों में पंजाब के कपूरथला, जालंधर, पठानकोट, पटियाला और मोगा शामिल हैं. इसके अलावा हरियाणा के अंबाला, जम्मू-कश्मीर के कठुआ और राजस्थान के अलवर-बीकानेर में भी कैमरे लगाए गए थे.’अधिकारी ने बताया कि फौजियों की आवाजाही, अंतरराष्ट्रीय सीमा से नजदीकी और महत्वपूर्ण सैन्य छावनियों की वजह ठिकाने बहुत संवदेनशील हैं.
अधिकारियों ने बताया कि फर्जी पहचान पत्र पर खरीदे गए सिम कार्ड इन कैमरों में लगाए गए थे. पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स मोबाइल ऐप के जरिए रियल टाइम फुटेज देखते थे. पुलिस के मुताबिक मॉड्यूल सीधे पाकिस्तानी हैंडलर्स के निर्देश पर काम कर रहा था. एडिशनल सीपी कुशवाह ने कहा, ‘आरोपियों को रक्षा ठिकानों, सैनिकों की आवाजाही और महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी, तस्वीरें सीमा पार भेजने का काम सौंपा गया था.’ उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील ठिकानों के पास सीसीटीवी कैमरे लगाना दिखाता है कि सुरक्षा बलों की आवाजाही पर नजर रखने के लिए बड़ी प्लानिंग थी.
कैमरों के साथ हथियार भी बरामद
अधिकारी के मुताबिक पंजाब और दिल्ली से 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. तकनीकी निगरानी और खुफिया जानकारी के आधार पर पुलिस ने 9 सीसीटीवी कैमरे, तीन विदेश निर्मित समेत चार पिस्तौल और 24 कारतूस बरामद किए. उन्होंने बताया, ‘सैन्य खुफिया इकाई की जानकारी पर दक्षिण पश्चिम रेंज द्वारा चलाए गए दूसरे अभियान में पंजाब से पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जो रेकी और सेना व सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) से जुड़े प्रतिष्ठानों के संवेदनशील दृश्य साझा करने में सक्रिय रूप से शामिल थे.’
पैसों का लालच देकर बनाया गया गद्दार
पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उन्हें पैसों का लालच देकर इस नेटवर्क में शामिल किया गया था, और ये पैसा सीमा पार से आने वाले हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी से आता था. अधिकारी ने बताया, ‘पंजाब में तरन तारन निवासी मनप्रीत सिंह नामक मुख्य आरोपी पाकिस्तान स्थित आकाओं के सीधे संपर्क में था और हथियारों की आपूर्ति में समन्वय व संचार को सुविधाजनक बनाने में अहम भूमिका निभा रहा था. उसे विदेशी निर्मित हथियारों की खेप प्राप्त हुई थी और उसने निर्देशों के अनुसार उन्हें अन्य सदस्यों में वितरित किया था.’एक अन्य आरोपी अनमोल ने अपने सहयोगी साहिल के साथ मिलकर कई स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की जिम्मेदारी संभाली थी.
हथियारों की भी तस्करी
अधिकारी ने बताया कि जासूसी के अलावा, जांच में हथियार तस्करी नेटवर्क का भी पर्दाफाश हुआ है जिसमें पाकिस्तान स्थित आकाओं ने भारतीय एजेंटों को अवैध हथियार प्राप्त करने और वितरित करने का निर्देश दिया था. इन गतिविधियों से उत्पन्न धन को डिजिटल भुगतान मंचों के माध्यम से भेजा जा रहा था और आगे के अभियानों को वित्तपोषित करने के लिए उपयोग किया जा रहा था.
टल गया आतंकी हमला
पुलिस ने कहा कि इन गिरफ्तारियों से एक संभावित आतंकी हमले को भी टाल दिया गया है, क्योंकि जानकारी मिली थी कि यह मॉड्यूल ग्रेनेड और अन्य माध्यमों से सुरक्षा प्रतिष्ठानों पर हमले की साजिश रच रहा था. इस कार्रवाई ने जासूसी, हथियार तस्करी और आतंकी साजिशों से जुड़े कई परस्पर जुड़े नेटवर्कों का पर्दाफाश किया है. उन्होंने कहा, ‘सुरक्षा एजेंसियां संभावित स्लीपर सेल की पहचान करने के लिए मोबाइल फोन और सीसीटीवी प्रणाली से प्राप्त डेटा सहित डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर रही हैं. आगे की जांच जारी है.’
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