अभय मिश्रा, मऊगंज। विकास की राहें सुगम बनाने के लिए सरकार करोड़ों का बजट जारी करती है, लेकिन रीवा और मऊगंज में विकास की इसी राह पर भ्रष्टाचार का ‘काला डामर’ फेर दिया गया है. जी हां, आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ यानी EOW ने एक ऐसे घोटाले की परतों को उधेड़ा है, जिसने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है. 18 करोड़ रुपये का भुगतान… फर्जी इनवॉइस… और अफसर समेत ठेकेदारों ने मिलकर सरकारी खजाने को चूना लगाया है.
रीवा और मऊगंज की सड़कें शायद इतनी मजबूत न हों, लेकिन भ्रष्टाचार का नेटवर्क बेहद मजबूत था. साल 2017 से 2021 के बीच, जब जनता अच्छी सड़कों का इंतजार कर रही थी, तब MPRRDA के साहब और ठेकेदार मिलकर नोटों की गड्डियां गिन रहे थे.
EOW की जांच में जो खुलासा हुआ है, वो हैरान करने वाला है. सड़कों के निर्माण में घटिया डामर का इस्तेमाल हुआ, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में इसे ‘नंबर वन’ बताया गया. हद तो तब हो गई जब Indian Oil Corporation Limited जैसी प्रतिष्ठित संस्था के नाम पर फर्जी इनवॉइस यानी नकली बिल तैयार किए गए.
इस खेल में अकेले रीवा में 12.71 करोड़ और मऊगंज में 5.88 करोड़ रुपये की बंदरबांट की गई. यानी कुल 18 करोड़ से ज्यादा की रकम डामर के नाम पर डकार ली गई. इस मामले में EOW ने 44 लोगों को आरोपी बनाया है. इसमें तत्कालीन महाप्रबंधक से लेकर उपयंत्री और रसूखदार ठेकेदार तक शामिल हैं. इन सभी पर जालसाजी (420), कूटरचित दस्तावेज (467, 468) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है.
ये घोटाला सिर्फ पैसे की हेराफेरी नहीं है, बल्कि उन लोगों की जान के साथ भी खिलवाड़ है जो इन घटिया सड़कों पर सफर करते हैं. देखना दिलचस्प होगा कि EOW की ये कार्रवाई किस अंजाम तक पहुंचती है.
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m
- छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- उत्तर प्रदेश की खबरें पढ़ने यहां क्लिक करें
- लल्लूराम डॉट कॉम की खबरें English में पढ़ने यहां क्लिक करें
- खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें
- मनोरंजन की बड़ी खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक

