संसद में जल्द महिला आरक्षण पर बहस होने वाली है. इसे एनडीए सरकार के सबसे महत्वकांक्षी विधेयकों में से एक मन जा रहा है. बीजेपी ने अपने सांसदों को व्हिप तक जारी किया है इस बिल के लिए. इसी कड़ी में पीएम नरेंद्र मोदी ने सोमवार कहा, ‘हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है. विधानसभाओं से लेकर संसद तक दशकों की प्रतीक्षा के अंत का समय आ गया है. इसलिए सरकार 16 से 18 अप्रैल तक संसद का स्पेशल सेशन लाई है.’ उन्होंने कहा, ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं के जीवन का बड़ा अवसर बनने जा रहा है. संसद तक पहुंचने का रास्ता आसान बनने जा रहा है. आज महिलाओं की भूमिका और भी अहम हो गई है. हमारी योजनाओं से औरतें आर्थिक रूप से ताकतवर बनीं. उन्होंने कहा कि मैं गृहस्थ नहीं हूं, लेकिन जानता सब हूं.’
21वीं सदी के महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सम्मेलन के दौरान कहा कि हर कोई लोकतांत्रिक ढांचों में महिलाओं के लिए आरक्षण प्रदान करने की आवश्यकता दशकों से महसूस कर रहा है. अब ये हकीकत में बदलने जा रहा है. पीएम मोदी ने कहा कि बैसाखी के त्योहार को लेकर देश में उत्साह का माहौल है. कल देश के विभिन्न हिस्सों में नव वर्ष भी मनाया जाएगा. आज मैं जलियांवाला बाग हत्याकांड के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं. देश के विकास पथ में इन महत्वपूर्ण पड़ावों के बीच, भारत 21वीं सदी के सबसे बड़े निर्णयों में से एक लेने जा रहा है. मैं अत्यंत जिम्मेदारी के साथ कह रहा हूं कि यह 21वीं सदी के महत्वपूर्ण निर्णयों में से एक है. यह निर्णय नारी शक्ति को समर्पित है. नारी शक्ति वंदन को समर्पित.
देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब
पीएम मोदी ने कहा, “हमारे देश की संसद एक नया इतिहास रचने के करीब है. एक ऐसा नया इतिहास जो अतीत के सपनों को साकार करेगा, जो भविष्य के संकल्पों को पूरा करेगा. एक ऐसे भारत का संकल्प जो समतावादी हो, जहां सामाजिक न्याय केवल एक नारा न हो, बल्कि हमारी कार्य संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का एक अभिन्न अंग हो. बता दें कि यह सम्मेलन संसद के उस सत्र से पहले आयोजित किया जा रहा है, जिसमें महिला आरक्षण कानून में प्रस्तावित संशोधनों को विचार और पारित करने के लिए पेश किए जाने की उम्मीद है.”
बिल को सभी दलों का समर्थन
नारी शक्ति वंदन अधिनियम का विपक्षी पार्टियों द्वारा समर्थन करने पर सराहना करते हुए, पीएम मोदी ने कहा, ” जब 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पेश किया गया था, तब सभी दलों ने इसे सर्वसम्मति से पारित किया था. उस समय सर्वसम्मति से यह मांग उठी थी कि इसे हर हाल में 2029 तक लागू किया जाना चाहिए. विशेष रूप से, हमारे सभी विपक्षी सहयोगियों ने इस बात पर ज़ोर दिया था कि इसे 2029 तक लागू किया जाना चाहिए. लोकतांत्रिक संरचनाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण की आवश्यकता दशकों से महसूस की जा रही है. यह चर्चा लगभग चार दशकों से चल रही है. इसमें सभी दलों और कई पीढ़ियों के प्रयास शामिल हैं. हर दल ने इस विचार को अपने-अपने तरीके से आगे बढ़ाया है.”
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