जगन्नाथ रथ यात्रा पर्व के रीति-रिवाज, जानिये जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व
जगन्नाथ रथ यात्रा पर्व के रीति-रिवाज, जानिये जगन्नाथ रथ यात्रा का महत्व
जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत कैसे और कब हुई, इसे लेकर कई तरह की कथाएं प्रचलति हैं.
जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत कैसे और कब हुई, इसे लेकर कई तरह की कथाएं प्रचलति हैं.
हालांकि 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच इसकी शुरुआत मानी जाती है.
हालांकि 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच इसकी शुरुआत मानी जाती है.
इस पर्व का सबसे खास महत्व यह है कि, रथ यात्रा का त्योहार सामाजिक भावना और एकता को बढ़ाता है.
इस पर्व का सबसे खास महत्व यह है कि, रथ यात्रा का त्योहार सामाजिक भावना और एकता को बढ़ाता है.
रथ यात्रा भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में लोग एक साथ आते हैं और पर्व मनाते हैं.
रथ यात्रा भव्य आयोजन में बड़ी संख्या में लोग एक साथ आते हैं और पर्व मनाते हैं.
छेरा रस्म-
छेरा रस्म की परंपरा है. इसमें उड़ीसा के महाराज सोने के झाड़ू से रथ की साफ-सफाई करते हैं. इसी प्रकिया को छेरा रस्म कहा जाता है.
छेरा रस्म-
छेरा रस्म की परंपरा है. इसमें उड़ीसा के महाराज सोने के झाड़ू से रथ की साफ-सफाई करते हैं. इसी प्रकिया को छेरा रस्म कहा जाता है.
बनते हैं तीन रथ- रथ यात्रा के दौरान एक नहीं बल्कि तीन रथ बनाए जाते हैं.
बनते हैं तीन रथ- रथ यात्रा के दौरान एक नहीं बल्कि तीन रथ बनाए जाते हैं.
भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम नंदीघोष है. यह लाल रंग का 16 पहिए वाला सबसे बड़ा रथ होता है.
भगवान जगन्नाथ के रथ का नाम नंदीघोष है. यह लाल रंग का 16 पहिए वाला सबसे बड़ा रथ होता है.
भगवान बलभद्र के रथ का नाम तालध्वज है जो हर, नीले और लाल रंग के तैयार होता है और यह 14 पहिए का होता है.
भगवान बलभद्र के रथ का नाम तालध्वज है जो हर, नीले और लाल रंग के तैयार होता है और यह 14 पहिए का होता है.
वहीं देवी सुभद्रा के रथ का नाम दर्पदलन है जोकि लाल और काले रंग का होता है और इसमें 12 पहिए होते हैं.
वहीं देवी सुभद्रा के रथ का नाम दर्पदलन है जोकि लाल और काले रंग का होता है और इसमें 12 पहिए होते हैं.
नौ दिन तक चलता है उत्सव- जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि यह लगभग नौ दिनों तक चलने वाला उत्सव है.
नौ दिन तक चलता है उत्सव- जगन्नाथ रथ यात्रा सिर्फ एक दिन का आयोजन नहीं, बल्कि यह लगभग नौ दिनों तक चलने वाला उत्सव है.
भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर में कुछ दिन विश्राम करते हैं और फिर ‘बहुदा यात्रा’ के दौरान वापस अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं.
भगवान जगन्नाथ गुंडिचा मंदिर में कुछ दिन विश्राम करते हैं और फिर ‘बहुदा यात्रा’ के दौरान वापस अपने मुख्य मंदिर लौटते हैं.
इस पूरे उत्सव में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और विशाल मेले का आयोजन होता है.
इस पूरे उत्सव में भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और विशाल मेले का आयोजन होता है.