उत्तर प्रदेश के नोएडा में श्रमिक आंदोलन के बीच कुछ अवांछनीय तत्व पाकिस्तानी एजेंडा पूरा कर रहे थे. श्रमिकों के विरोध को हाईजैक करने के लिए दो सोशल मीडिया अकाउंट लगातार पाकिस्तान से सक्रिय थे, जिससे 13 अप्रैल को भड़का बवाल हिंसा में बदल गया. गौतमबुद्ध नगर पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने नोएडा हिंसा के पीछे पाकिस्तानी कनेक्शन का बड़ा खुलासा किया है. पुलिस को इसके साक्ष्य भी मिले हैं. लक्ष्मी सिंह ने बताया कि पिछले दो दिनों से नोएडा में शांति है. पुलिस ने शांति व्यवस्था बहाल करने फ्लैग-मार्च निकाला. नोएडा क्षेत्र की सभी इंडस्ट्रियल यूनिटों में एक से तीन शिफ्टों में श्रमिकों से शांतिपूर्वक काम किया गया.

लक्ष्मी सिंह ने बताया कि 13 अप्रैल को भीड़ ने बवाल किया था और पुलिस ने उसको नियंत्रित किया. हालांकि दोपहर में बवाल शांत होने के बाद दो सोशल मीडिया हैंडल के जरिए झूठा नरेटिव फैलाने की कोशिश की गई. पुलिस की फायरिंग में मजदूरों की मौत का भ्रम भी फैलाया गया. मामले को ट्वीट के जरिए वायरल कराया गया. इसके बाद वापस लौट रहे श्रमिक भड़क उठे थे. इन दो एक्स हैंडल के खिलाफ थाना सेक्टर 20 में मुकदमे लिखे गए. विवेचना के दौरान एक्स से गुरूवार को मिली डिटेल में सामने आया कि ये दोनों हैंडल लगातार पाकिस्तान से संचालित किए जा रहे थे. इनकी इंटरनेट कनेक्टिविटी और आईपी एड्रेस पाकिस्तान के हैं. ये हैंडल वीपीएन का भी उपयोग कर रहे थे. मामले की जांच जारी है.

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नोएडा में खुशी से काम पर लौटे श्रमिक

पुलिस कमिश्नर ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा हाई लेवल केमिटी की सिफरिश को स्वीकर करते हुए, सभी श्रमिकों के न्यूनतम वेतनमान में जो वृद्धि की गई थी, इससे संतोष की भावना देखी गई है. साथ ही उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा श्रमिकों की भावनाओं और मांगों को देखते हुए एक वेज बोर्ड का गठन किया गया था, जिसकी सूचना सभी श्रमिकों को दे दी गई है. श्रमिक इस फैसले के बाद खुशी से काम पर लौट आए हैं. पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने गौतमबुद्धनगर के श्रमिकों समेत आम लोगों से अपील की. उन्होंने कहा कि किसी के भी उकसावे में न आए। अफवाहों पर ध्यान न दें, ऐसी किसी भी घटना को पुलिस के संज्ञान में लाए. गौमतबुद्ध नगर शांतिप्रिय जिला रहा है, यहां उद्योग-धंधों के साथ आम जनजीवन भी सामान्य रहा है। इसे बरकरार रखने में पुलिस का सहयोग करें.