लखनऊ. यूपी सरकार में विकास कागजों में इतना दौड़ चुका है कि वह दौड़-दौड़ के थक चुका है. मानों विकास कहीं आराम फरमा रहा है. यही वजह है जमीन से विकास कहीं गायब हो गया है. योगी सरकार में मंत्री एके शर्मा बिजली विभाग में विकास के लाख दावे तो करते हैं, लेकिन असलियत में उनके दावे झूठे साबित हो रहे हैं. विकास के नाम पर लोगों को सिर्फ तकलीफें मिल रही हैं. ऐसा ही एक मामला सामने आया है. जहां बिजली विभाग ने बिल भरने के बाद भी एक बुजुर्ग के घर की बिजली काट दी, जो कई सवाल खड़े कर रहा है. इसे लेकर कांग्रेस ने भी निशाना साधा है.
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बता दें कि बिजली उपभोक्ता हरिश्चंद्र पांडेय का एक वीडियो सामने आया है. उनका कहना है कि उनकी अनुपस्थिति में बच्चों को डरा-धमकाकर जबरन ‘स्मार्ट प्रीपेड मीटर’ लगा दिया गया. 6 अप्रैल को 900 रुपये और 17 अप्रैल को 600 रुपये जमा करने के बावजूद 10:30 बजे उनके घर की बत्ती गुल कर दी गई. बिजली विभाग में जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है. मंत्री जी गांव-गांव तो घूम रहे हैं, लेकिन इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं. लगता है वे चुनाव लड़ने के लिए बिजली विभाग से फंड इकट्ठा कर रहे हैं.
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कांग्रेस ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “अंधेर नगरी, चौपट राजा: क्या जनता को लूटकर भरा जा रहा है चुनावी चंदा?” हरिश्चंद्र जी का आरोप है कि उनकी अनुपस्थिति में बच्चों को डरा-धमकाकर जबरन ‘स्मार्ट प्रीपेड मीटर’ थोप दिया गया. सितम देखिए कि 6 April को 900 रुपये और आज सुबह 600 रुपये जमा करने के बावजूद 10:30 बजे उनके घर की बत्ती गुल कर दी गई. रसीद हाथ में है, मीटर में लाइट है, लेकिन घर में अंधेरा. यह तकनीकी खराबी है या विभाग की वसूली का नया तरीका?
भाजपा सरकार के बिजली मंत्री जी, क्या आपके विभाग में इतना भ्रष्टाचार व्याप्त हो गया है कि रसीद दिखाने के बाद भी बुजुर्गों को प्रताड़ित किया जा रहा है? लोकतंत्र सेनानी का यह सवाल कि “क्या जनता को परेशान कर चुनाव फंड जुटाया जा रहा है?” सीधे आपकी कार्यप्रणाली पर वार करता है. जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं और बिजली बिल के नाम पर ‘फ्रॉड’ होने लगे, तो आम जनता कहां जाए? इस खुलेआम लूट और कुप्रबंधन पर जवाब दीजिए!
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