पीएम मोदी और एंटी हिंदू पोस्ट करने को लेकर लगातार आलोचना का सामना कर रही Lenskart के संस्थापक और CEO पीयूष बंसल की पत्नी निधि मित्तल बंसल का X अकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया गया है। बता दें कि, उन्होंने कई वर्षों पहले एंटी हिन्दू और अन्त्य मोदी पोस्ट किय थे जिसके स्क्रीनशॉट्स अब वायरल हो रहे हैं। ये दिखाते हैं कि निधि मित्तल बंसल आम आदमी पार्टी (AAP) का समर्थन कर रही थीं, जबकि BJP और हिंदू संगठनों के खिलाफ तीखी टिप्पणियां पोस्ट कर रही थीं।
कुछ पोस्ट में #vote4mufflerman और #DelhiDecides जैसे हैशटैग थे। जबकि अन्य में हिंदू महासभा की आलोचना की गई थी और BJP के बारे में अपमानजनक बातें कही गई थीं। जैसे ही ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैलीं, उनका अकाउंट (@nidhimittal13) एक्सेस से बाहर हो गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि बढ़ते विरोध के बीच इसे हटा दिया गया था।

पियूष बंसल की लेंसकार्ट का क्या विवाद
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब पीयूष बंसल खुद लेंसकार्ट की एक विवादित स्टाइल गाइड को लेकर कड़ी जांच के दायरे में हैं। इस गाइड में हिंदू धार्मिक प्रतीकों के साथ भेदभाव किया गया था। यह विवाद तब शुरू हुआ, जब लेंसकार्ट स्टाफ यूनिफॉर्म एंड ग्रूमिंग गाइड नाम का 23 पन्नों का एक अंदरूनी दस्तावेज़ ऑनलाइन सामने आया। बताया जा रहा है कि यह दस्तावेज़ 2 फरवरी, 2026 का है। इसमें कर्मचारियों के लिए ग्रूमिंग के नियम तय किए गए थे, लेकिन धार्मिक प्रतीकों के प्रति इसके रवैये को लेकर भारी विरोध भड़क उठा।
निधि मित्तल कौन हैं?
निधि मित्तल एक सोशल इम्पैक्ट प्रोफेशनल हैं, जिन्हें मुख्य रूप से Lenskart के संस्थापक पीयूष बंसल की पत्नी के तौर पर जाना जाता है। उनका बैकग्राउंड पत्रकारिता और पब्लिक हेल्थ में रहा है, लेकिन उनका करियर ज़्यादातर सामाजिक विकास और हेल्थकेयर से जुड़ा रहा है। वह अभी Lenskart Foundation की चेयरपर्सन हैं, जिसका मुख्य मकसद आंखों की फ्री जांच करवाना, किफ़ायती चश्मे बांटना और भारत में रोकी जा सकने वाली अंधता के बारे में जागरूकता फैलाना है। इसके अलावा, निधि मित्तल भारत के जाने-माने स्टार्टअप्स में से एक, Lenskart में शेयरहोल्डर भी हैं। बताया जाता है कि कंपनी में उनकी अच्छी-खासी हिस्सेदारी है।
Lenskart की स्टाइल गाइडलाइन
इस गाइड में कहा गया था कि कर्मचारियों को बिंदी या पवित्र धागा (कलावा) पहनने की अनुमति नहीं है, और ग्रूमिंग नियमों के तहत उन्हें अपनी कलाई पर बंधे धार्मिक बैंड हटाने होंगे। वहीं, इसमें हिजाब और पगड़ी पहनने की अनुमति दी गई थी, हालांकि इसके साथ कुछ शर्तें भी थीं, जैसे कि इनका रंग अनिवार्य रूप से काला होना चाहिए। दस्तावेज़ में यह सलाह भी दी गई थी कि अगर सिंदूर लगाया जाता है, तो उसे बहुत कम मात्रा में लगाया जाए और पूरे माथे पर न फैलाया जाए।
पियूष बंसल का बयान
इस विरोध के बीच, पीयूष बंसल ने 15 अप्रैल को एक बयान जारी किया। शुरू में उन्होंने वायरल हो रहे दस्तावेज़ को गलत बताया और दावा किया कि यह लेंसकार्ट की मौजूदा नीतियों को नहीं दर्शाता है। हालांकि, X (पहले ट्विटर) पर एक ‘कम्युनिटी नोट’ ने इस दावे को चुनौती दी। इस नोट में बताया गया कि दस्तावेज़ पर फरवरी 2026 की तारीख और कंपनी की आधिकारिक ब्रांडिंग मौजूद थी, जिससे यह साफ़ होता है कि यह न तो पुराना था और न ही इसे गलत तरीके से पेश किया गया था।
अपने अगले ट्वीट में, बंसल ने अपना रुख बदलते हुए स्वीकार किया कि वह दस्तावेज़ असली था। लेकिन उन्होंने इसे एक पुरानी आंतरिक ट्रेनिंग सामग्री बताया, न कि कोई आधिकारिक HR नीति। उन्होंने माना कि बिंदी और तिलक लगाने पर रोक लगाने वाली बात कभी लिखी ही नहीं जानी चाहिए थी और दावा किया कि 17 फरवरी को ही इसे आंतरिक तौर पर हटा दिया गया था।
उन्होंने आगे कहा कि कंपनी के संस्थापक और CEO होने के नाते, वह इस चूक की ज़िम्मेदारी लेते हैं। उन्होंने दोहराया कि लेंसकार्ट किसी भी तरह की सम्मानजनक धार्मिक अभिव्यक्ति पर न तो रोक लगाता है और न ही भविष्य में लगाएगा।
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