​पटना। राजधानी के दीघा सेतु घाट पर रविवार का दिन मातम में बदल गया। गंगा स्नान करने आए चार किशोर अलग-अलग समय पर गहरे पानी में समा गए। लगभग तीन घंटे के सघन तलाशी अभियान के बाद दो बच्चों के शव बरामद कर लिए गए हैं, जबकि दो अन्य की तलाश अब भी जारी है। प्रशासन ने अंधेरा होने के कारण रविवार शाम को रेस्क्यू ऑपरेशन रोक दिया था, जिसे सोमवार सुबह पुनः शुरू किया जाएगा।

​अलग-अलग समय पर हुए हादसे

​दीघा थाना पुलिस के अनुसार, ये हादसे दोपहर 1:00 बजे से शाम 4:30 बजे के बीच हुए। पहला बच्चा दोपहर एक बजे डूबा, जिसके बाद ढाई बजे के करीब दो और बच्चे गहराई में चले गए। शाम साढ़े चार बजे एक और किशोर हादसे का शिकार हो गया। SDRF की टीम स्थानीय गोताखोरों की मदद से लापता बच्चों को ढूंढने में जुटी है।

​मृतकों और लापता की पहचान

​हादसे में जान गंवाने वालों में जक्कनपुर निवासी आदित्य कुमार उर्फ प्रिंस (15) और दानापुर के सुल्तानपुर निवासी कृषु कुमार (16) शामिल हैं। वहीं, श्री कृष्णा पुरी के करण कुमार (13) और एक अन्य अज्ञात किशोर की तलाश जारी है। करण अपनी मां के साथ घाट पर गया था, जबकि कृषु की मौत दूसरों को बचाने के प्रयास में हुई।

​प्रशासन पर लापरवाही का आरोप

​लापता करण के चाचा और जदयू नेता नागेंद्र गिरी ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस की मौजूदगी के बावजूद बचाव कार्य में देरी हुई। प्रशासन की टीम NDRF का इंतजार करती रही, जिससे कीमती समय बर्बाद हुआ। वहीं, कृषु के पिता ने बताया कि उनका बेटा एक अन्य डूबते हुए लड़के को बचाने के लिए पानी में कूदा था, लेकिन खुद भी गहराई की चपेट में आ गया।

​खतरे की घंटी: सुरक्षा पर सवाल

​शाम ढलने के बाद सर्च ऑपरेशन बंद किए जाने से परिजनों में आक्रोश है। स्थानीय लोगों का कहना है कि रविवार को घाटों पर भीड़ अधिक रहती है, ऐसे में पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती न होना बड़े हादसे को दावत देता है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और सोमवार सुबह फिर से गोताखोरों को उतारा जाएगा।