कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश और हरियाणा की राजनीति में एक दिलचस्प मोड़ आ गया है। जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) इस कानून को पास करवाकर खुद को महिलाओं का सबसे बड़ा हितैषी बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इस पर सवाल उठाकर नया दांव चल दिया है। बीजेपी का पूरा फोकस इस बात पर है कि उसने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण (Reservation) देने का ऐतिहासिक काम किया है, ताकि आगामी चुनावों में इसका सीधा राजनीतिक लाभ मिल सके।
वर्तमान सीटों का गणित और कांग्रेस का पलटवार
बीजेपी का तर्क है कि नई जनगणना (Census) और सीटों के पुनर्निर्धारण (Delimitation) के बाद ही यह आरक्षण लागू हो पाएगा। लेकिन कांग्रेस ने खेल पलटते हुए सीधा सवाल किया है कि जब अभी लोकसभा में 543 सीटें हैं, तो उनमें ही तुरंत 33 प्रतिशत आरक्षण क्यों नहीं दिया जा रहा? कांग्रेस इसे ‘देरी की राजनीति’ बता रही है। इस रणनीति की वजह से अब पूरी राजनीतिक बहस भविष्य की 853 सीटों के बजाय वर्तमान की 543 सीटों पर सिमट गई है।
हरियाणा में क्रेडिट बनाम क्रियान्वयन की जंग
प्रदेश के राजनीतिक मंचों और सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा पूरी तरह छाया हुआ है। बीजेपी जहां कांग्रेस को ‘महिला विरोधी’ बताकर घेर रही है, वहीं कांग्रेस इसे केवल श्रेय लेने का जरिया कह रही है। असल में, यह लड़ाई अब सिर्फ कानून की नहीं बल्कि महिलाओं के बीच अपनी साख जमाने की है। अब देखना यह होगा कि जनता बीजेपी की लंबी प्रक्रिया पर भरोसा करती है या कांग्रेस के ‘अभी क्यों नहीं’ वाले सवाल को तवज्जो देती है।

