सोनू वर्मा, नूंह। जिले के फिरोजपुर झिरका उपमंडल में हरियाणा सरकार की “सरल न्याय” पहल प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ती नजर आ रही है। जनता की समस्याओं को मौके पर सुलझाने के दावों के साथ शुरू हुए ये समाधान शिविर अब महज कागजी खानापूर्ति बनकर रह गए हैं। बृहस्पतिवार को आयोजित शिविर में प्रशासन की पोल उस वक्त खुल गई जब हाजिरी रजिस्टर में तो 19 कर्मचारियों की उपस्थिति दर्ज थी, लेकिन मौके पर केवल 11 कर्मचारी ही मौजूद मिले। अधिकारियों की इस गैर-जिम्मेदारी और समस्याओं का निपटारा न होने के कारण अब आम जनता का भरोसा इन शिविरों से उठने लगा है, जिसके चलते लोगों ने यहां आना भी कम कर दिया है।
एसडीएम नदारद और क्लर्क के भरोसे शिविर, शिकायतकर्ता ने बनाया वीडियो
शिविर में व्यवस्था का आलम यह था कि उपमंडल के एसडीएम समेत अधिकांश विभागों के प्रमुख अधिकारी अपनी कुर्सियों से गायब थे। एक जागरूक शिकायतकर्ता ने मौके का करीब 25 मिनट का वीडियो रिकॉर्ड किया है, जिसमें खाली पड़ी कुर्सियां और रजिस्टर में दर्ज झूठी हाजिरी साफ देखी जा सकती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बड़े अधिकारियों की जगह छोटे क्लर्क शिकायतें लेते हैं, जिनके पास समस्याओं के समाधान का कोई अधिकार नहीं होता। सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद कि शिविर में एसडीएम और विभाग प्रमुखों की मौजूदगी अनिवार्य है, फिरोजपुर झिरका में नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
अतिक्रमण अभियान का बहाना और भविष्य में कार्रवाई का आश्वासन
मामले में मचे बवाल के बाद एसडीएम लक्ष्मीनारायण ने सफाई देते हुए कहा कि वे अंबेडकर चौक पर अतिक्रमण हटाओ अभियान में बतौर ड्यूटी मजिस्ट्रेट व्यस्त थे। उन्होंने दावा किया कि अधीनस्थ कर्मचारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दे दिए गए थे। हालांकि, रजिस्टर में दर्ज कर्मचारियों के गायब होने पर उन्होंने आश्वासन दिया है कि भविष्य में सभी विभाग अध्यक्षों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी।
एसडीएम ने दी चेतावनी
एसडीएम ने चेतावनी दी है कि जो भी अधिकारी बिना सूचना के अनुपस्थित पाया जाएगा, उससे स्पष्टीकरण मांगकर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। अब देखना होगा कि प्रशासन की यह सख्ती हकीकत बनती है या फिर जनता ऐसे ही धक्के खाती रहेगी।

