देश का कौन-सा राज्य देता है सबसे सस्ते मजदूर, जानें

देश में अगर सस्ते श्रम की बात करें तो मध्य प्रदेश, गुजरात, त्रिपुरा, नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य इस मामले में सबसे आगे हैं.

इन राज्यों में ग्रामीण और कृषि कार्यों के लिए मिलने वाली दैनिक मजदूरी राष्ट्रीय औसत की तुलना में काफी कम है.

यहां अकुशल मजदूरों को बहुत ही कम दिहाड़ी पर दिनभर हाड़-तोड़ मेहनत करनी पड़ती है.

गैर-कृषि मजदूरों के मामले में मध्य प्रदेश सबसे नीचे है, जहां एक मजदूर को औसतन केवल 246.3 रुपये प्रतिदिन ही मिल पाते हैं.

इसके अलावा गुजरात और त्रिपुरा के कृषि और निर्माण क्षेत्र में भी मजदूरी दरें देश में सबसे निचले स्तर पर बनी हुई हैं.

पूर्वोत्तर के नागालैंड और अरुणाचल प्रदेश में भी न्यूनतम मजदूरी की स्थिति ऐसी ही है, जो दिल्ली, केरल और महाराष्ट्र जैसे अधिक वेतन देने वाले राज्यों के मुकाबले काफी दयनीय है.

लक्षद्वीप में महिलाओं की स्थिति और भी खराब है, जहां महिला बेरोजगारी दर 79.7 प्रतिशत और पुरुष बेरोजगारी दर 26.2 प्रतिशत है.

इसके बाद दूसरे नंबर पर अंडमान और निकोबार द्वीप समूह है, जहां कुल युवा बेरोजगारी दर 33.6 प्रतिशत है

यहां भी महिलाओं की बेरोजगारी 49.5 प्रतिशत और पुरुषों की 24 प्रतिशत के उच्च स्तर पर है.

केरल में कुल युवा बेरोजगारी दर 29.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जिसमें महिलाओं की हिस्सेदारी 47.1 प्रतिशत और पुरुषों की 19.3 प्रतिशत है.

नागालैंड में यह आंकड़ा 27.4 प्रतिशत, मणिपुर में 22.9 प्रतिशत, लद्दाख में 22.2 प्रतिशत और अरुणाचल प्रदेश में 20.9 प्रतिशत दर्ज किया गया है.

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