भिवानी के गुजरानी रोड स्थित सतलोक आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय समागम का रविवार को श्रद्धा के साथ समापन हुआ। इस दौरान भक्ति के साथ-साथ सामाजिक सुधार के कार्यों पर जोर दिया गया।

अजय सैनी, भिवानी। छोटी काशी के नाम से प्रसिद्ध भिवानी के गुजरानी रोड स्थित सतलोक आश्रम में आयोजित तीन दिवसीय ‘विश्व शांति महा धार्मिक अनुष्ठान’ का रविवार को पूर्ण श्रद्धा और उल्लास के साथ समापन हो गया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल महाराज के सान्निध्य में आयोजित इस भव्य समागम में देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं ने शिरकत की। कार्यक्रम के अंतिम दिन विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों स्वयंसेवकों और जिला कोऑर्डिनेटर्स ने सुव्यवस्थित प्रबंधन के साथ सेवाएं दीं। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक आस्था का प्रदर्शन किया, बल्कि सामाजिक सरोकार और एकता का संदेश भी समाज के बीच प्रसारित किया।

अमर ग्रंथ साहिब का अखंड पाठ और भक्तिमय वातावरण

इस तीन दिवसीय अनुष्ठान के दौरान संत गरीब दास महाराज द्वारा रचित ‘अमर ग्रंथ साहिब’ की दिव्य वाणियों का अखंड पाठ किया गया। इन वाणियों के निरंतर श्रवण से पूरा आश्रम परिसर भक्ति के रंग में सराबोर रहा। समागम का मुख्य आकर्षण केवल आध्यात्मिक चर्चा तक सीमित नहीं था, बल्कि यहाँ मानवता की सेवा के कई अनुकरणीय कार्य भी किए गए। आयोजन के दूसरे दिन जहाँ 6 जोड़ों का ‘रमैणी’ (गुरुवाणी के माध्यम से बिना किसी दहेज और आडंबर के) विवाह संपन्न कराया गया, वहीं श्रद्धालुओं ने सामाजिक उत्तरदायित्व निभाते हुए 150 यूनिट रक्तदान भी किया।

मानव धर्म और विश्व कल्याण का संदेश

आश्रम प्रबंधन समिति और सेवादारों ने संत रामपाल महाराज के मूल मंत्र “जीव हमारी जाति है, मानव धर्म हमारा” को दोहराते हुए कहा कि इस अनुष्ठान का मुख्य उद्देश्य विश्व में शांति स्थापित करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि महाराज का उद्देश्य एक ऐसे समाज का निर्माण करना है जो नशा, दहेज और जाति-पाति के भेदभाव से पूरी तरह मुक्त हो। अनुष्ठान की समाप्ति पर श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया और समाज सुधार के संकल्प के साथ अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया। समिति के अनुसार, यह आयोजन संपूर्ण विश्व के कल्याण की सामूहिक प्रार्थना का एक स्वरूप था।

अतिरिक्त जानकारी और व्यवस्था प्रबंधन

समागम के सफल संचालन के लिए आश्रम परिसर को विभिन्न विभागों में बांटा गया था, ताकि भारी भीड़ के बावजूद सुरक्षा और भोजन व्यवस्था में कोई कमी न रहे। स्थानीय प्रशासन और पुलिस का भी यातायात प्रबंधन में सहयोग सराहनीय रहा। स्वयंसेवकों ने स्वच्छता और अनुशासन का विशेष ध्यान रखा, जो आधुनिक धार्मिक आयोजनों के लिए एक मिसाल बन गया है। आने वाले समय में भी आश्रम द्वारा ऐसे जनकल्याणकारी आयोजनों की श्रृंखला जारी रखने की बात कही गई है, ताकि नई पीढ़ी को नैतिक और आध्यात्मिक मूल्यों से जोड़ा जा सके।