पटना। ​बिहार की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की घोषणा के बाद अब जनता को अपनी शिकायतों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे। जिला प्रशासन द्वारा पटना जिले की प्रत्येक पंचायत में नियमित रूप से ‘सहयोग शिविर’ आयोजित किए जाएंगे, जिसकी औपचारिक शुरुआत 19 मई से होने जा रही है।

​शिविर का शेड्यूल और कार्यप्रणाली

​प्रशासन द्वारा तैयार किए गए कैलेंडर के अनुसार, प्रत्येक माह के पहले और तीसरे मंगलवार को पंचायतों में इन शिविरों का आयोजन होगा। अभियान के पहले ही दिन पटना की 40 पंचायतों में एक साथ शिविर लगाए जाएंगे। जिलाधिकारी ने इसके लिए पंचायतवार रोस्टर जारी कर दिया है ताकि व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और सुलभ रहे।

​एक ही मंच पर सभी विभागों का समाधान

​इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां जनता को ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ की सुविधा मिलेगी। शिविर में राजस्व, बिजली, आपूर्ति, कल्याण और शिक्षा जैसे विभिन्न विभागों के अधिकारी एक साथ मौजूद रहेंगे। ग्रामीण अपनी शिकायतें लिखित रूप में सीधे जमा कर सकेंगे और उन पर मौके पर ही प्रारंभिक कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।

​30 दिनों के भीतर निपटारे की गारंटी

​सरकार ने इस अभियान के लिए 30 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की है। यानी किसी भी आवेदन का अधिकतम एक महीने के भीतर समाधान सुनिश्चित करना होगा। यह व्यवस्था केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि अधिकारियों को आवेदन के फॉलो-अप और अंतिम निपटारे की रिपोर्ट भी देनी होगी।

​इन समस्याओं का होगा त्वरित समाधान

​सहयोग शिविरों में मुख्य रूप से निम्नलिखित मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:

  • ​राजस्व मामले: जमीन का दाखिल-खारिज, सीमांकन और भूमि विवाद।
  • ​कल्याणकारी योजनाएं: राशन कार्ड, वृद्धावस्था पेंशन, प्रधानमंत्री आवास योजना और मनरेगा।
  • ​दस्तावेज: जाति, आय और निवास प्रमाण पत्र से जुड़ी अड़चनें।
  • ​बुनियादी सुविधाएं: बिजली, पानी, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा से संबंधित शिकायतें।

​जवाबदेही और पारदर्शिता

​जिलाधिकारी ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि केवल शिकायतों को फाइलों में बंद करना उद्देश्य नहीं है, बल्कि शिकायतकर्ता की संतुष्टि अनिवार्य है। वरिष्ठ अधिकारियों को इन शिविरों की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया है। यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
​इस पहल से न केवल भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी, बल्कि आम आदमी और प्रशासन के बीच का फासला भी कम होगा।