अशोक कुमार जायसवाल, चंदौली। जिले के डीडीयू नगर (मुगलसराय) में पिछले चार दिनों से स्थानीय प्रशासन और लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा मुगलसराय बाजार में अतिक्रमण हटाने और सड़क चौड़ीकरण के नाम पर दुकानों को तोड़ने की कार्रवाई जारी है। इस कार्रवाई से व्यापारियों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है। सपा नेता सिद्धांत जायसवाल ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

बिना सहमति के दुकानों को तोड़ा जा रहा

जायसवाल ने कहा कि किसी भी शहर का विकास तभी सफल होता है जब उसमें स्थानीय जनता और व्यापारियों की भागीदारी हो। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सहमति और संवाद के दुकानों को तोड़ा जा रहा है, जो सीधे तौर पर व्यापारियों का उत्पीड़न है। उन्होंने सड़क चौड़ीकरण परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) को सार्वजनिक करने की मांग की। जायसवाल ने कहा कि यदि कोई योजना बनी है, तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए और व्यापारियों के साथ बैठक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

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जायसवाल ने एसडीएम और पीडब्ल्यूडी अधिकारियों के बयानों में विरोधाभास का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि एक तरफ जमीन को पीडब्ल्यूडी की बताया जा रहा है, जबकि उनका दावा है कि यह भूमि नगर पालिका द्वारा लीज पर ली गई थी और 2019 तक दुकानदारों से किराया भी वसूला गया था। उन्होंने दुकानों को तोड़ने के बजाय एलिवेटेड पुल बनाने का विकल्प सुझाया। जायसवाल के अनुसार, वाराणसी के बाबतपुर और चौकाघाट की तर्ज पर सुभाष पार्क से पिलर आधारित एलिवेटेड पुल बनाया जा सकता था, जिससे बाजार भी सुरक्षित रहता और यातायात भी सुचारु होता।

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व्यापारियों और सपा कार्यकर्ताओं ने अपनी मुख्य मांगें रखी हैं। इनमें विकास कार्य योजनाबद्ध तरीके से करने, ‘सेटबैक’ के साथ निर्माण का विकल्प अपनाने, एलिवेटेड ओवरब्रिज बनाकर बाजार को बचाने, रामनगर की तर्ज पर उचित मुआवजा देने और डीपीआर को सार्वजनिक कर भ्रम दूर करने की मांग शामिल है। व्यापारियों और सपा कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विरोध करने वालों को डराया-धमकाया जा रहा है और आवाज उठाने पर मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का “सबका साथ, सबका विकास” का नारा जमीनी स्तर पर विफल साबित हो रहा है।

राजनीतिक असर की चेतावनी

सपा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे पार्टी अध्यक्ष कहना है कि “सबका साथ, सबका विकास” का नारा जमीनी स्तर पर विफल साबित हो रहा है। सपा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि वे पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर व्यापारियों के साथ खड़े हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि 2027 के विधानसभा चुनाव में व्यापारी एकजुट होकर इसका जवाब देंगे।

व्यापारियों का कहना है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बिना संवाद और मुआवजे के की जा रही कार्रवाई उनके लिए विनाशकारी है। उनका मांग है कि सरकार संवेदनशीलता दिखाए और विकास के साथ-साथ आजीविका की सुरक्षा भी सुनिश्चित करे।

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