पटना। ​भारतीय राजनीति और न्यायिक गलियारों में लंबे समय से चर्चित IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में एक बार फिर नया मोड़ आया है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले को लेकर होने वाली सुनवाई अब टल गई है। अदालत अब इस मामले में अपना अंतिम फैसला 22 मई को सुनाएगी। गौर करने वाली बात यह है कि अदालत ने इस मामले में आरोप तय करने की प्रक्रिया पहले ही पूरी कर ली थी और अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था, लेकिन अब तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है।

​निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती

​लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव ने निचली अदालत द्वारा अक्टूबर 2025 में दिए गए उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए गए थे। लालू परिवार का तर्क है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप निराधार हैं और यह पूरी कानूनी प्रक्रिया राजनीतिक द्वेष से प्रेरित है। दूसरी तरफ, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की है, जिससे लालू परिवार पर कानूनी शिकंजा और कसता नजर आ रहा है।

​CBI का कड़ा रुख: ‘सबूत पुख्ता हैं’

​केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने लालू परिवार की याचिका का जोरदार विरोध किया है। अदालत में अपनी दलील पेश करते हुए CBI ने स्पष्ट किया कि उनके पास आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और ठोस सबूत मौजूद हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि उनके हाथ ऐसे कई अहम दस्तावेज लगे हैं, जो सीधे तौर पर इस घोटाले में लालू यादव और उनके परिवार की संलिप्तता को उजागर करते हैं। CBI के अनुसार, जांच के दौरान सामने आए साक्ष्य आरोपों को साबित करने के लिए काफी हैं।

​क्या है पूरा IRCTC टेंडर घोटाला?

​यह पूरा विवाद उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री के पद पर आसीन थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान रांची और पुरी में स्थित IRCTC के दो होटलों के रखरखाव और टेंडर आवंटन में भारी अनियमितताएं बरती गईं। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन होटलों को नियमों को ताक पर रखकर निजी कंपनियों को पट्टे (Lease) पर दिया गया था। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी थी और इसके बदले में लालू परिवार को जमीन के रूप में अनुचित आर्थिक लाभ पहुंचाया गया।

​कोर्ट की तल्ख टिप्पणी और भविष्य की राह

​राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व में सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि इस टेंडर घोटाले की पूरी साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई थी। अदालत का मानना है कि टेंडर प्रक्रिया में दखल देकर विशिष्ट निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाया गया, जिससे अंततः उनके परिवार की संपत्ति में वृद्धि हुई। इसी आधार पर लालू, राबड़ी और तेजस्वी के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया गया था। अब सबकी नजरें 22 मई पर टिकी हैं, जब अदालत यह तय करेगी कि लालू परिवार को राहत मिलेगी या उनकी कानूनी परेशानियाँ और बढ़ेंगी।