गया। बिहार की राजनीति में ‘हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर)’ के राष्ट्रीय अध्यक्ष संतोष सुमन एक बार फिर मंत्री पद की शपथ लेकर चर्चा में हैं। सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें तीसरी बार कैबिनेट में जगह मिली है। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के पुत्र संतोष सुमन ने अपनी एक अलग राजनीतिक पहचान बनाई है, जो केवल विरासत तक सीमित नहीं है।

​राजनीतिक विरासत और मजबूत पारिवारिक आधार

​संतोष सुमन के परिवार की बिहार की राजनीति, विशेषकर गया क्षेत्र में गहरी पैठ है। जहां उनके पिता जीतन राम मांझी केंद्र में मंत्री के रूप में सक्रिय हैं, वहीं उनके परिवार के अन्य सदस्य भी विधायी भूमिकाओं में हैं। उनकी पत्नी दीपा मांझी इमामगंज विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करती हैं, जबकि उनकी सास ज्योति मांझी बाराचट्टी से विधायक हैं। खुद संतोष सुमन वर्तमान में बिहार विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं।

​शिक्षा और शैक्षणिक पृष्ठभूमि

​संतोष सुमन की पहचान केवल एक राजनेता की नहीं, बल्कि एक विद्वान की भी है। 10 फरवरी 1975 को गया के महकार गांव में जन्मे संतोष की प्रारंभिक शिक्षा बिहार में हुई, जिसके बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। उन्होंने यूजीसी-नेट की परीक्षा उत्तीर्ण की और मगध विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। राजनीति में आने से पहले वे एक शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ता रहे हैं और वर्तमान में गयाजी कॉलेज में प्रोफेसर के पद पर भी कार्यरत हैं।

​’हम’ पार्टी का उदय और नेतृत्व

​जब जीतन राम मांझी ने जेडीयू से अलग होकर ‘हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा’ का गठन किया, तब संतोष सुमन संगठन के मुख्य स्तंभ बनकर उभरे। उन्होंने विशेष रूप से दलित और महादलित समाज की राजनीति को धार दी। संगठन में उनके समर्पण को देखते हुए उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया।

​चुनावी सफर: बिना विधानसभा चुनाव लड़े कैबिनेट तक

​संतोष सुमन का राजनीतिक सफर दिलचस्प रहा है। उन्होंने अब तक कोई विधानसभा चुनाव नहीं जीता है, लेकिन 2018 में पहली बार विधान परिषद सदस्य (MLC) बनने के बाद से वे लगातार सत्ता के केंद्र में रहे हैं।

  • ​2020: नीतीश सरकार में पहली बार मंत्री बने (SC-ST कल्याण और लघु सिंचाई विभाग)।
  • ​2023: महागठबंधन सरकार के दौरान दोबारा मंत्री बने, लेकिन जेडीयू से वैचारिक मतभेदों के चलते इस्तीफा दे दिया।
  • ​2024-2025: एनडीए सरकार की वापसी के साथ वे फिर से कैबिनेट का हिस्सा बने। 2025 के चुनावों में खुद प्रत्याशी न होने के बावजूद, पार्टी के 5 विधायकों के समर्थन और अपनी प्रशासनिक पकड़ के कारण उन्हें पुनः मंत्री बनाया गया।

​संतोष सुमन का मंत्री बनना यह दर्शाता है कि गठबंधन की राजनीति में उनकी उपयोगिता और संगठन पर उनकी पकड़ काफी मजबूत है।