अनुराग शर्मा, सीहोर। जिला अस्पताल से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। जहाँ एक ओर माता-पिता अपने बच्चों की लंबी उम्र के लिए दुआएं मांगते हैं, वहीं दूसरी ओर एक नवजात बच्ची का शव पिछले चार दिनों से मर्चुरी में अपने परिजनों की राह देखता रहा।

क्या है पूरा मामला?

सिविल सर्जन डॉ. यू.के. श्रीवास्तव के अनुसार, अंजनी और रवि (निवासी हकीमाबाद) के यहाँ 24 मार्च को जुड़वां बच्चों का जन्म हुआ था। प्रसव के दौरान एक बच्चे की मृत्यु हो गई थी। दूसरी बच्ची का जन्म के समय वजन मात्र 1.4 किलोग्राम था, जो कि सामान्य से बहुत कम था। बच्ची को बचाने के लिए उसे 40 दिनों तक गहन चिकित्सा इकाई में रखा गया और हर संभव इलाज दिया गया। अंततः 3 मई  की शाम को बच्ची ने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्ची के इलाज के दौरान भी उसके पिता केवल एक या दो बार ही उससे मिलने आए। बच्ची की मृत्यु के बाद अस्पताल प्रबंधन ने कई बार उनसे संपर्क करने की कोशिश की, फोन किए, लेकिन उन्होंने फोन उठाना बंद कर दिया।
डॉ. यू.के. श्रीवास्तव, सिविल सर्जन ने कहा कि हमने पुलिस चौकी और कोतवाली को भी सूचित किया है। परिजनों के काम करने के स्थान पर भी संदेश भिजवाया गया, लेकिन चार दिन बीत जाने के बाद भी कोई शव लेने नहीं आया।

कहा गई ममता

एक गहरा मानवीय प्रश्न है कि आज के दौर में जहाँ हम प्रगति की बातें करते हैं, वहीं ऐसी घटनाएं समाज के एक कड़वे सच को उजागर करती हैं। एक मासूम जिसने 40 दिनों तक अस्पताल के बिस्तर पर ज़िंदगी की जंग लड़ी, उसे अंत में अपनों का कंधा तक नसीब नहीं हुआ। अस्पताल के मर्चुरी फ्रीजर में रखा वह नन्हा शव आज हर किसी से पूछता रहा क्या गरीबी या मजबूरी इतनी बड़ी हो सकती है कि ममता का गला घोंट दे? यह घटना हमें याद दिलाती है कि समाज में अभी भी संवेदनाओं को जगाने की बहुत ज़रूरत है।

70 हजार के कर्ज के बदले पिता को बनाया बंधक, इसलिए लाश लेने नहीं आए

​ बच्ची के पिता रवि ने पुलिस को अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह एक स्थानीय किसान, मनोज जाट के पास काम करता था। रवि के मुताबिक, उस पर किसान का लगभग 70,000 रुपये का कर्ज बकाया था। इसी कर्ज की वसूली के लिए किसान ने रवि और उसके एक अन्य साथी को जबरन बंधक बना लिया था।

रवि ने बताया कि उसकी बच्ची अस्पताल में भर्ती थी, लेकिन कर्ज न चुका पाने के कारण किसान ने उसे बच्ची के पास जाने की अनुमति नहीं दी। रवि के अनुसार ​उसे और उसके साथी को ‘नजरबंद’ कर दिया गया था। किसान का कहना था कि जब तक पैसे का हिसाब नहीं होगा, तब तक उसे वहां से जाने नहीं दिया जाएगा। पुलिस ने रवि से पूछताछ कर रहे हैं। रवि ने बताया कि वह चाहकर भी पुलिस के पास नहीं जा सका क्योंकि उसे आने ही नहीं दिया जा रहा था। जब पुलिस गांव पहुंची, तब जाकर उसे वहां से निकाला गया।

पिता का आरोप है कि यदि उसे समय पर अस्पताल जाने दिया जाता, तो शायद उसकी बच्ची की जान बच सकती थी। पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है और आरोपी किसान के विरुद्ध सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है। यह घटना बंधुआ मजदूरी और मानवीय संवेदनाओं के खत्म होने का एक भयावह उदाहरण पेश करती है। इस खबर ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है।

बताया गया है कि पुलिस अस्पताल से मिली सूचना के बाद मृतक बच्ची के माता-पिता को खोजने आष्टा के ग्राम हकीमाबाद गई थी। लेकिन वहां से पता चला की बच्ची के माता-पिता अंजलि और रवि, देवास जिले के सोनकच्छ के पास ग्राम जालेरिया में है जहां से पुलिस उनको लेकर आज सीहोर आई और बच्ची की डेड बॉडी उनके सुपुर्द की गई। मामला देवास से जुड़ा होने के कारण वहां की पुलिस को भी सूचना दी है।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m