इस जज को कहा जाता है भारत का सबसे ईमानदार न्यायाधीश, जानिए कौन थे जस्टिस खन्ना?
इस जज को कहा जाता है भारत का सबसे ईमानदार न्यायाधीश, जानिए कौन थे जस्टिस खन्ना?
भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो सिर्फ फैसलों से नहीं बल्कि अपने साहस और ईमानदारी से अमर हो गए.
भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जो सिर्फ फैसलों से नहीं बल्कि अपने साहस और ईमानदारी से अमर हो गए.
उन्हीं में से एक नाम हैं जस्टिस एच. आर. खन्ना का जिन्हें आज भी सबसे ईमानदार न्यायाधीश के रूप में याद किया जाता है.
उन्हीं में से एक नाम हैं जस्टिस एच. आर. खन्ना का जिन्हें आज भी सबसे ईमानदार न्यायाधीश के रूप में याद किया जाता है.
जस्टिस खन्ना का पूरा नाम हंसराज खन्ना था. उनका जन्म 3 जुलाई 1912 को अमृतसर में हुआ था.
जस्टिस खन्ना का पूरा नाम हंसराज खन्ना था. उनका जन्म 3 जुलाई 1912 को अमृतसर में हुआ था.
यह बात साल 1975 की है जब देश में आपातकाल लगाया गया. इस दौरान तमाम नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया.
यह बात साल 1975 की है जब देश में आपातकाल लगाया गया. इस दौरान तमाम नागरिकों के मौलिक अधिकारों को सीमित कर दिया गया.
तभी इस बीच एक ऐतिहासिक मामला सुप्रीम कोर्ट में आया, जिसे “एडीएम जबलपुर केस” (Habeas Corpus Case) के नाम से जाना जाता है.
तभी इस बीच एक ऐतिहासिक मामला सुप्रीम कोर्ट में आया, जिसे “एडीएम जबलपुर केस” (Habeas Corpus Case) के नाम से जाना जाता है.
इस केस में सवाल यह था कि क्या आपातकाल के दौरान भी किसी नागरिक को अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ अदालत में जाने का अधिकार है या नहीं.
इस केस में सवाल यह था कि क्या आपातकाल के दौरान भी किसी नागरिक को अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ अदालत में जाने का अधिकार है या नहीं.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच बनी. चार जजों ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया कि आपातकाल के दौरान नागरिकों को अदालत जाने का अधिकार नहीं है.
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के पांच जजों की बेंच बनी. चार जजों ने सरकार के पक्ष में फैसला दिया कि आपातकाल के दौरान नागरिकों को अदालत जाने का अधिकार नहीं है.
लेकिन जस्टिस खन्ना ने इस फैसले से असहमति जताई. उन्होंने अकेले खड़े होकर कहा कि जीवन और
लेकिन जस्टिस खन्ना ने इस फैसले से असहमति जताई. उन्होंने अकेले खड़े होकर कहा कि जीवन और
स्वतंत्रता का अधिकार किसी भी हालत में छीना नहीं जा सकता, चाहे आपातकाल ही क्यों न हो.
स्वतंत्रता का अधिकार किसी भी हालत में छीना नहीं जा सकता, चाहे आपातकाल ही क्यों न हो.
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