लुधियाना। पंजाब के लुधियाना से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहाँ घरेलू विवाद ने इतना उग्र रूप ले लिया कि एक पिता ने अपने ही जवान बेटे की हत्या कर दी और बाद में खुद भी आत्महत्या कर ली। यह पूरी घटना लुधियाना के न्यू एगर नगर इलाके की है। जानकारी के अनुसार, आरोपी पिता सुरिंदर सिंह एक सेवानिवृत्त फौजी था और वर्तमान में एक निजी बैंक में सुरक्षा गार्ड के रूप में कार्यरत था। सुरिंदर सिंह की पहली पत्नी का करीब 5 साल पहले निधन हो चुका था।
वह किसी अन्य महिला के साथ दूसरा विवाह करना चाहता था, जिसका उसका बेटा गुरशरण सिंह कड़ा विरोध कर रहा था। इस बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर बहस होती रहती थी। रविवार देर रात घर में बहस इतनी बढ़ गई कि सुरिंदर सिंह ने आपा खो दिया और अपनी लाइसेंसी दुनाली बंदूक निकाल ली।
पिता ने घर के अंदर ही बेटे पर गोली चला दी, जो उसकी बांह पर लगी। जान बचाने के लिए गुरशरण घर से बाहर सड़क की ओर भागा, लेकिन पिता ने उसका पीछा किया। सड़क पर सुरिंदर ने बेटे को निशाना बनाकर और गोलियां चलाईं, जिससे गुरशरण की मौके पर ही मौत हो गई। बेटे को मौत के घाट उतारने के कुछ ही मिनट बाद पिता वापस घर लौटा और जहरीला पदार्थ पी लिया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने बताया कि बेटा दम तोड़ चुका था, जबकि पिता को गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की गहराई से जांच की जा रही है। मृतक सुरिंदर सिंह के तीन बच्चे थे। बेटा गुरशरण सिंह घर पर ही रहता था, जबकि उसकी दो बेटियां (पुष्पिंदर कौर और हरप्रीत कौर) विदेश (कनाडा और इंग्लैंड) में रहती हैं। इस दुखद घटना ने पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल पैदा कर दिया है।
- ‘बांग्लादेश की तर्ज पर भारत में भी सत्ता परिवर्तन…’ राजनाथ सिंह का राहुल गांधी पर हमला
- Koderma Accident: जन्मदिन की खुशियां बदलीं मातम में, तिलैया डैम में डूबकर दो दोस्तों की मौत, तीन को बचाया गया
- गयाजी-बोधगया में दुर्गा पूजा पर ट्रैफिक एडवाइजरी, 17 से 21 अक्टूबर तक शहर में नो-एंट्री, जानें बदला रूट और पार्किंग
- CJP के प्रदर्शन से व्यापार प्रभावित होने पर SC की टिप्पणी, कहा- उम्मीद है सद्बुद्धि आएगी
- बड़ी खबरः 27% ओबीसी आरक्षण को लेकर CM डॉ. मोहन की प्रतिनिधियों के साथ अहम बैठक, सुप्रीम कोर्ट में प्रभावी पैरवी और नए संवैधानिक समाधान की उठी मांग

