सोहराब आलम, मोतिहारी। जिले के अरेराज स्थित शंभू एंड संस (इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप, गायघाट) पर नकली पेट्रोल की शिकायतों के बाद प्रशासन की कार्रवाई और जांच प्रक्रिया अब संदेह के घेरे में आ गई है। अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) और कार्यपालक दंडाधिकारी द्वारा किए गए संयुक्त निरीक्षण के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

​प्रशासनिक जांच और पहली नजर के दावे

​अरेराज एसडीएम ने निरीक्षण के बाद एक प्रेस नोट जारी कर पेट्रोल, डीजल, XP95 और ग्रीन डीजल के सैंपल लैब भेजने की बात कही। प्रशासन के अनुसार, शुरुआती फिल्टर टेस्ट, विशिष्ट घनत्व (स्पेसिफिक डेंसिटी) परीक्षण, मापन यंत्र की जांच और स्टॉक मिलान में सब कुछ ठीक पाया गया। हालांकि, जमीनी हकीकत इन दावों के बिल्कुल विपरीत नजर आती है।

​सैंपल सीलिंग पर उठे बड़े सवाल और लापरवाही

​जांच के दौरान सबसे बड़ी खामी यह सामने आई कि जिन पेट्रोल और डीजल के नमूनों को सील किया गया, उन पर किसी भी जिम्मेदार या स्वतंत्र व्यक्ति के हस्ताक्षर नहीं लिए गए। बिना हस्ताक्षर के सैंपल सील होने से इसकी विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान लग गए हैं। जानकारों का कहना है कि ऐसे में सैंपल के साथ छेड़छाड़ या बदलाव की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता, जिससे निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है।
​इसके अलावा, जब पेट्रोल और डीजल की मैनुअल और ऑटोमेशन जांच की गई, तो रिकॉर्ड में भारी अंतर पाया गया। रिपोर्ट में इस अंतर का स्पष्ट जिक्र होने के बावजूद, प्रशासन द्वारा जारी किए गए आधिकारिक प्रेस नोट में इसका कोई उल्लेख नहीं किया गया, जिससे प्रशासन की मंशा पर संदेह गहराता है।

​सेल्स ऑफिसर की कार्यप्रणाली पर संदेह

​मामले में इंडियन ऑयल के सेल्स ऑफिसर राहुल का बयान भी हैरान करने वाला है। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पास कुल 85 पेट्रोल पंपों की जिम्मेदारी है, लेकिन पिछले दो वर्षों में उन्होंने इस पेट्रोल पंप से कभी भी जांच के लिए सैंपल नहीं लिया था। जनता और विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा का विषय है कि आखिर दो साल में 85 पंपों के बीच गायघाट के इस पेट्रोल पंप की सुध क्यों नहीं ली गई?