नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर को राष्ट्रीय राजधानी में उच्च न्यायालय परिसर के साथ-साथ सभी जिला न्यायालय परिसरों की सुरक्षा ऑडिट करने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम गठित करने का निर्देश दिया है. इस साल सितंबर में रोहिणी जिला अदालत में फायरिंग की घटना के बाद दर्ज एक स्वत: संज्ञान मामले से निपटने के लिए मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायाधीश ज्योति सिंह की खंडपीठ ने कुछ निर्देश जारी किए हैं.

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अदालत के निर्देश के अनुसार, कोर्ट परिसर में प्रवेश करने वाले सभी व्यक्तियों की सुरक्षा कर्मियों द्वारा जांच की जाएगी. दो जांच बिंदुओं यानि कोर्ट परिसरों के प्रवेश द्वार और न्यायालय कक्षों वाले भवनों के प्रवेश द्वारों पर जांच और तलाशी ली जाएगी. आदेश में यह भी कहा गया है कि गठित टीम सुरक्षा संबंधी विभिन्न पहलुओं जैसे कि तैनात किए जाने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या, लगाए जाने वाले सीसीटीवी कैमरों की संख्या पर विचार-विमर्श करेगी. आदेश के अनुसार, दिल्ली पुलिस की स्थिति रिपोर्ट में कुछ उपाय किए गए हैं, हालांकि एक बार का उपाय या एक्सरसाइज पर्याप्त नहीं होगी. ऑडिट के आधार पर पुलिस आयुक्त सुरक्षा-व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा करेंगे और दी गई स्थिति के आधार पर जरूरी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा और जरूरी गैजेट स्थापित किए जाएंगे.

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इसमें आगे कहा गया है कि चूंकि दिल्ली पुलिस के पास सुरक्षा के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता है, इसलिए अदालत प्रशासन और दिल्ली सरकार को सूचित करते हुए सुरक्षा संबंधी उपकरण सीधे उनके द्वारा खरीदे जाएंगे. जैसे ही उपकरणों की खरीद की जाती है, बिना किसी देरी के एनसीटी दिल्ली सरकार द्वारा आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराई जाएगी. अदालत ने जरूरी चीजों पर जोर देते हुए कहा कि संबंधित बार एसोसिएशन उन सभी अधिवक्ताओं को क्यूआर कोड/बार कोड/स्मार्ट चिप के साथ आईडी कार्ड जारी करने के लिए एक तंत्र तैयार करेंगे, जो इन संघों के सदस्य हैं. उन अधिवक्ताओं के लिए जो दिल्ली बार काउंसिल में नामांकित हैं, लेकिन किसी बार एसोसिएशन के सदस्य नहीं हैं, दिल्ली बार काउंसिल द्वारा समान आईडी कार्ड जारी किए जाएंगे. इसके अलावा यह भी कहा गया है कि पहचान पत्र अहस्तांतरणीय होंगे और प्रवेश के समय सभी न्यायालय परिसरों में उपयोग किए जाने योग्य होने चाहिए.

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दिल्ली हाईकोर्ट की पीठ ने पुलिस से यह सुनिश्चित करने को कहा कि मेटल डिटेक्शन और बैगेज स्कैनिंग में नवीनतम तकनीक का इस्तेमाल किया जाए. बिना स्कैन किए कोर्ट परिसर के अंदर किसी भी सामान की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसने जोर देकर कहा कि सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से अदालत भवनों की चौबीसों घंटे निगरानी की जानी चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि कैमरे बिना किसी चूक के काम करने की स्थिति में हों. अदालत ने मामले को 18 अप्रैल 2022 को आगे की सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से पहले कहा कि उच्च जोखिम वाले विचाराधीन कैदियों (यूटीपी) के संबंध में जहां तक संभव हो, उनकी उपस्थिति आभासी (वर्चुअल) मोड के माध्यम से सुरक्षित की जा सकती है.