AIR INDIA को कंज्यूमर कोर्ट से बड़ा झटका लगा है. दिल्ली में डिस्ट्रिक्ट कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन-VI ने एअर इंडिया को एक लंबी दूरी की इंटरनेशनल फ्लाइट में सर्विस में कमी के लिए एक पैसेंजर और उसकी बेटी को 1.5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है. पीड़ित पिता-बेटी ने टूटी सीटों, फ्लाइट में एंटरटेनमेंट सिस्टम के काम न करने, गंदे वॉशरूम, खराब खाने की सर्विस और केबिन क्रू की तरफ से ठीक से जवाब न देने की शिकायत की थी. उपभोक्ता कमीशन ने 14 जनवरी के अपने आदेश में कहा, कमीशन का मानना है कि शिकायत करने वाला, सुविधाएं न देने के लिए मानसिक पीड़ा और परेशानी के लिए मुआवजे का हकदार होगा, जिसके लिए काफी पैसे लिए गए थे.
उपभोक्ता आयोग ने एअर इंडिया को घटिया इन-फ्लाइट सेवाओं के लिए एक यात्री और उसकी बेटी को ₹1.5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है. टूटी सीटें, खराब मनोरंजन सिस्टम, गंदे वॉशरूम और खराब भोजन जैसी शिकायतों पर यह फैसला आया. आयोग ने कहा कि एयरलाइन बुनियादी सुविधाएं न देने पर मुआवजे की हकदार होगी.
कमीशन ने टिकट की रकम वापस करने की दरखास्त यह कहते हुए ठुकरा दी कि पैसेंजर ने अपनी यात्रा पूरी कर ली थी. यह आदेश कमीशन की प्रेसिडेंट पूनम चौधरी और मेंबर शेखर चंद्रा की एक कमेटी ने शैलेंद्र भटनागर नाम के शख्स की शिकायत पर दिया. शैलेंद्र ने सितंबर 2023 में मेक माय ट्रिप से बुक किए गए इकॉनमी क्लास टिकट पर अपनी बेटी के साथ एअर इंडिया की दिल्ली-न्यूयॉर्क-दिल्ली फ्लाइट में सफर किया था.
लंबी यात्रा के दौरान कई कमियों का आरोप लगाया. इसमें टूटी सीटें, खराब कंट्रोल और कॉल बटन, काम न करने वाली एंटरटेनमेंट स्क्रीन, गंदे वॉशरूम, एयरक्राफ्ट के अंदर बदबू, खराब क्वालिटी का खाना और ड्रिंक्स और बार-बार शिकायत करने के बावजूद केबिन क्रू की तरफ से कोई जवाब न देना शामिल है. एअर इंडिया ने आरोपों से इनकार किया.
एअर इंडिया ने कहा, एयरक्राफ्ट की उड़ान से पहले रूटीन जांच हुई थी और उसे ऑपरेशन के लिए मंजूरी दे दी गई थी. एयरलाइन ने दावा किया कि शिकायत करने वाले और उनकी बेटी ने बिजनेस क्लास में अपग्रेड के लिए रिक्वेस्ट की थी, जो खाली सीटों की कमी के कारण नहीं दी जा सकी. उन्होंने कहा कि रिक्वेस्ट ठुकराए जाने के बाद ही शिकायतें सामने आईं.
शिकायतकर्ता ने यात्रा की तारीख बदलने के लिए दिए गए एक्स्ट्रा चार्ज सहित ₹3.18 लाख का पूरा रिफंड और ₹10 लाख का हर्जाना मांगा था. इस पर कमीशन ने रिफंड की रिक्वेस्ट यह कहते हुए मना कर दी कि यात्रियों ने यात्रा पूरी करके सर्विस का फायदा उठाया था. इन हालात में रिफंड के बजाय हर्जाना ही सही उपाय है.
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