वेनेजुएला को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। अमेरिकी संसद के ऊपरी सदन सीनेट में एक अहम प्रस्ताव पास हो गया है, जो विदेशों में सैन्य कार्रवाई को लेकर राष्ट्रपति की शक्तियों को सीमित करता है। अमेरिकी सीनेट ने बिना संसद की मंजूरी किसी भी सैन्य कार्रवाई पर रोक लगाने वाला प्रस्ताव पास कर दिया. इस प्रस्ताव के पक्ष में 52 वोट पड़े, जबकि 47 सीनेटरों ने ट्रंप का समर्थन किया. खास बात यह रही कि ट्रंप की ही पार्टी के पांच सीनेटरों ने उनके खिलाफ वोट देकर अंदरूनी असहमति को साफ कर दिया. इसमें ट्रंप की पार्टी के पांच सीनेटरों ने भी विरोध में वोट दिया.

यह प्रस्ताव वेनेजुएला में संभावित अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के विरोध में लाया गया था. प्रस्ताव के मुताबिक, अमेरिका बिना संसद की अनुमति के किसी भी देश के खिलाफ युद्ध या सैन्य कार्रवाई नहीं कर सकता. इसका मतलब साफ है कि अब वेनेजुएला या किसी अन्य देश में सैन्य कदम उठाने से पहले ट्रंप को कांग्रेस की मंजूरी लेनी होगी. इससे राष्ट्रपति के हाथ काफी हद तक बंध गए हैं.

वेनेजुएला मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका लगा है. हालांकि, यह प्रस्ताव अभी कानून नहीं बना है. नियमों के अनुसार, इसे संसद के दूसरे सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स से भी पास होना जरूरी है. दोनों सदनों की मंजूरी के बाद ही राष्ट्रपति के हस्ताक्षर से यह कानून का रूप लेगा. ट्रंप के पास इस प्रस्ताव को वीटो करने का अधिकार भी है, लेकिन मौजूदा वोटिंग ने उनके लिए राजनीतिक मुश्किलें जरूर बढ़ा दी हैं. ट्रंप का कहना है कि अमेरिका लंबे समय तक वेनेजुएला की सरकार पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और वहां के तेल उद्योग को अमेरिकी कंपनियों के लिए खोलना चाहता है. हालांकि यह अब तक साफ नहीं है कि इस योजना में अमेरिकी सेना की भूमिका क्या होगी और यह सब कैसे लागू किया जाएगा.

ट्रंप ने वेनेजुएला की अंतरिम नेता और मादुरो की पूर्व सहयोगी डेल्सी रोड्रिगेज को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर वह अमेरिका की शर्तें नहीं मानती हैं, तो उन्हें मादुरो से भी बड़ी कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसके अलावा ट्रंप ने कोलंबिया और ग्रीनलैंड के खिलाफ भी सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है।.

सीनेट के इस फैसले के बावजूद अमेरिका ने वेनेजुएला पर अपनी सख्ती कम नहीं की है। अमेरिका ने वेनेजुएला को लेकर अपनी सख्ती और बढ़ा दी है. मादुरो की गिरफ्तारी के बाद भी अमेरिकी सेना कैरिबियन क्षेत्र में तैनात हैं. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि ड्रग तस्करी में शामिल नावों पर हमले आगे भी जारी रहेंगे. अमेरिका ने बीते दिन वेनेजुएला जा रहे एक रूसी तेल टैंकर को भी जब्त किया था.

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